• चुनावी हार के बावजूद कुर्सी न छोड़ने पर बढ़ा संवैधानिक टकराव, अब नई सरकार गठन की कवायद तेज


पश्चिम बंगाल : विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी सत्ता छोड़ने से इनकार कर रही ममता बनर्जी सरकार को आखिरकार राज्यपाल आरएन रवि ने बर्खास्त कर दिया। राजभवन की ओर से जारी आदेश में पूरे मंत्रिमंडल को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।


दरअसल, 4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में तृणमूल कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि जनादेश उनके खिलाफ नहीं है और वह इस्तीफा नहीं देंगी।


राजनीतिक संकट लगातार गहराने के बाद राज्यपाल ने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को पद से हटाने का फैसला लिया। राजभवन के आदेश में कहा गया कि चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार नैतिक और राजनीतिक आधार खो चुकी थी, लेकिन सत्ता हस्तांतरण की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ऐसे में राज्य की प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया।


राजनीतिक गलियारों में अब नई सरकार गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल जल्द ही सबसे बड़े दल बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। वहीं बंगाल में पिछले डेढ़ दशक से जारी ममता बनर्जी के शासन का अंत होने के बाद बीजेपी समर्थकों में जश्न का माहौल देखा जा रहा है।


चुनावी नतीजों के बाद ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग, केंद्रीय बलों और केंद्र सरकार पर निशाना साधती रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव में धांधली और वोट चोरी हुई है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह इस पूरे मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस तक ले जाएंगी। राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना के बीच भी उन्होंने पद न छोड़ने की बात कही थी।


विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। सीपीआई-एम और एआईएसएफ को एक-एक सीट मिली थी। हालांकि पूरे चुनाव में बीजेपी की बढ़त इतनी बड़ी रही कि विपक्ष पूरी तरह बिखरा हुआ नजर आया।


अब बंगाल की राजनीति की नजरें राजभवन और नई सरकार के गठन पर टिक गई हैं। राज्य में आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि नई सत्ता व्यवस्था और राजनीतिक समीकरण बंगाल की दिशा तय करेंगे।