अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के बीच तेल कंपनियों ने लगातार तीसरी बार बढ़ाए दाम
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। पिछले दस दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है।
तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज क्षेत्र से जुड़े संकट के बाद ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर भी पड़ रहा है।
सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पिछले कई सप्ताह से बढ़ी हुई कीमतों का बोझ खुद उठा रही थीं। हालांकि लगातार हो रहे नुकसान के बाद कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से कीमतों में बढ़ोतरी शुरू की। सबसे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके बाद 19 मई को फिर संशोधन हुआ और अब एक बार फिर कीमतें बढ़ाई गई हैं। इस तरह पिछले कुछ दिनों में कुल बढ़ोतरी करीब 4.8 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके थे कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों का नुकसान बहुत बड़ा स्तर छू सकता है। अनुमान के मुताबिक कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये के दबाव का सामना कर रही थीं। ऐसे में हालिया मूल्य वृद्धि को घाटा पूरी तरह खत्म करने के बजाय नुकसान कम करने की कोशिश माना जा रहा है।
देश में प्रतिदिन करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत होती है और सरकारी कंपनियों का खुदरा बाजार में बड़ा हिस्सा है। ऐसे में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी से कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व तो मिलेगा, लेकिन इससे पूरी वित्तीय चुनौती खत्म होती नहीं दिख रही। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में ईंधन के दाम पर और दबाव बढ़ सकता है।
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफे का असर परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से बाजार में महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है।