• दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मेडिकल एडमिशन और कथित पेपर दिलाने के नाम पर चल रहे गिरोह का खुलासा किया है


दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नीट यूजी 2026 परीक्षा से जुड़े एक बड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार एक संगठित गिरोह छात्रों और उनके परिवारों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने तथा कथित प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर भारी रकम की वसूली कर रहा था। जांच के दौरान पुलिस ने राजद के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह ने नीट परीक्षा से पहले कई छात्रों और अभिभावकों से संपर्क साधा था। आरोप है कि मेडिकल सीट सुनिश्चित कराने और परीक्षा में मदद दिलाने के नाम पर छात्रों से लाखों रुपये लिए गए। जानकारी के अनुसार कुछ छात्रों को होटल और फ्लैटों में भी रखा गया था, जहां से पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला।


जांच में सामने आया है कि गिरोह का संचालन कथित तौर पर संतोष कुमार जायसवाल कर रहा था। पुलिस का दावा है कि गिरोह में शामिल अन्य आरोपी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर अखलाक आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद पटेल भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार एक आरोपी कथित फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करता था, जबकि अन्य लोग छात्रों और परिवारों तक पहुंच बनाने तथा पूरी व्यवस्था संभालने का काम करते थे।


क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली या बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।


इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने राजद पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है, वह राजद का राष्ट्रीय सचिव और पार्टी नेतृत्व का करीबी बताया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पेपर लीक और अब मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठगी का मामला सामने आ रहा है, जिससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।


भाजपा ने दावा किया कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं इस पूरे मामले के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार और किन राज्यों या लोगों से जुड़े हुए हैं।