• 2 जून को कोचिंग सेंटर पर हुए हंगामे के मामले में थे जेल में बंद। 12 दिन बाद जमानत पर रिहाई का रास्ता साफ


पटना : राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज में हुए हंगामे और हमले के मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे रौशन आनंद को पटना सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई है। यह राहत ऐसे समय मिली है जब उनके छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।


जानकारी के अनुसार, खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में 2 जून को हुए विवाद और हमले के मामले में रौशन आनंद, उनके भाई प्रिंस यादव समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। घटना के अगले दिन यानी 3 जून को पुलिस ने रौशन आनंद और उनके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब करीब 12 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें अदालत से जमानत मिल गई है।


इस मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी है कि खान सर के नाम से चर्चित फैजल खान की गिरफ्तारी पर अदालत ने 20 जून तक अंतरिम रोक लगा रखी है।


उधर, रविवार को नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल से रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव के मृत मिलने की खबर सामने आई। मामले की जांच कर रही नेपाली पुलिस ने पूछताछ के लिए पांच लोगों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रिंस के चेहरे पर चोट के निशान पाए गए हैं। वहीं होटल के कमरे से मिर्गी की दवा भी बरामद होने की बात सामने आई है।


परिजनों के अनुसार, प्रिंस यादव का अंतिम संस्कार सोमवार को सहरसा में किया जाएगा। जमानत मिलने के बाद रौशन आनंद के भी अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।


प्रिंस यादव की मौत के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पूर्व मंत्री और राजद नेता तेज प्रताप यादव ने इस घटना को हत्या बताया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


वहीं खान सर ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रिंस पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके अनुसार, किसी प्रकार की मारपीट या हमले की बात सही नहीं है और मामले को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।


फिलहाल एक ओर जहां कोचिंग सेंटर विवाद से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर प्रिंस यादव की मौत की गुत्थी सुलझाने में नेपाल पुलिस जुटी हुई है। दोनों घटनाओं को लेकर लोगों की नजरें जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।