- स्वास्थ्य विभाग और विश्वविद्यालय से मिली स्वीकृति, अब एनएमसी की मंजूरी का इंतजार
मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार में चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाई देने की दिशा में श्री कृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय से मेडिकल सीटों में वृद्धि की उठ रही मांग अब साकार होती नजर आ रही है। महाविद्यालय प्रशासन ने एमबीबीएस की सीटों को 120 से बढ़ाकर 150 करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे आने वाले समय में अधिक छात्रों को डॉक्टर बनने का अवसर मिल सकेगा।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. (प्रो.) कुमारी विभा के नेतृत्व में सीट वृद्धि को लेकर आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विश्वविद्यालय से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं। अब केवल नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इसके लिए महाविद्यालय प्रशासन की ओर से विधिवत आवेदन भेज दिया गया है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।
यदि एनएमसी से अनुमति मिल जाती है तो आगामी शैक्षणिक सत्र से एसकेएमसीएच में एमबीबीएस की 150 सीटों पर नामांकन शुरू हो जाएगा। इससे न केवल मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि बिहार और विशेषकर उत्तर बिहार के छात्रों को भी अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
वर्तमान में एसकेएमसीएच में प्रतिवर्ष 120 छात्रों का एमबीबीएस पाठ्यक्रम में नामांकन होता है। सीटों की संख्या बढ़ने से 30 अतिरिक्त छात्र हर वर्ष चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में डॉक्टरों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए मेडिकल सीटों में विस्तार समय की मांग है और यह कदम उसी दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एनएमसी के मानकों के अनुरूप आवश्यक संसाधनों, शिक्षकों, आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार काम किया गया है। इसी का परिणाम है कि सीट वृद्धि का प्रस्ताव अब अंतिम मंजूरी के चरण तक पहुंच गया है।
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि सीटों में वृद्धि से न केवल छात्रों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण निवेश साबित होगा। आने वाले वर्षों में अधिक संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार होंगे, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अब महाविद्यालय प्रशासन, छात्र और अभिभावक सभी की निगाहें एनएमसी के फैसले पर टिकी हैं। यदि मंजूरी मिलती है तो एसकेएमसीएच उत्तर बिहार में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करेगा।
