आठ से अधिक घायल, करंट फैलने की अफवाह के बाद मची अफरातफरी। सावन की तीसरी सोमवारी पर जलाभिषेक के लिए उमड़ी थी भारी भीड़

लखीसराय : सावन की तीसरी सोमवारी पर भगवान शिव को जल चढ़ाने अशोकधाम पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए सोमवार की सुबह मातम में बदल गई। प्रसिद्ध श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के बाहरी परिसर में अचानक मची भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि आठ से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को सदर अस्पताल लखीसराय में भर्ती कराया गया है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा अशोकधाम स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात में इस मार्ग पर बिजली का एक पोल तार समेत गिर गया था। सुबह जलाभिषेक के लिए हजारों की संख्या में कांवरिये और अन्य श्रद्धालु मंदिर की तरफ बढ़ रहे थे। इसी दौरान भीड़ में यह बात फैल गई कि गिरे हुए बिजली के पोल और तार में करंट आ गया है। करंट की आशंका की बात फैलते ही लोगों में दहशत पैदा हो गई और श्रद्धालु सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।

भीड़ इतनी अधिक थी कि कुछ ही क्षणों में हालात बेकाबू हो गए। एक तरफ करंट की आशंका से लोग तेजी से पीछे हटने और इधर-उधर निकलने की कोशिश कर रहे थे, दूसरी तरफ मंदिर की ओर बढ़ रही भीड़ का दबाव लगातार बना हुआ था। इसी अफरातफरी के दौरान कई श्रद्धालु गिर पड़े और उनके ऊपर पीछे से आ रहे लोग भी गिरते चले गए।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब छह बजे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी थी। इसी दौरान भीड़ का दबाव बढ़ने से बांस-बल्ले से तैयार की गई बैरिकेडिंग भी टूट गई। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। कुछ श्रद्धालुओं को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे एक-दूसरे के नीचे दब गए। हादसे के बाद मंदिर के बाहरी इलाके में चीख-पुकार मच गई।

स्थानीय लोगों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। भीड़ में दबे लोगों को किसी तरह बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी भी सक्रिय हो गए। प्रशासन और आसपास के लोग राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।

लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। डीएम अस्पताल में रहकर घायलों के इलाज और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं, जबकि एसपी प्रेरणा कुमार मंदिर परिसर में कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन के अनुसार सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है।

मृतकों में अधिकतर महिलाएं

अब तक सामने आई जानकारी में मृतकों में मनमाला देवी (44), पति निरंजन कुमार, बड़हिया; रिंकू देवी (50), पति नीरज यादव, मुंगेर के सफियासराय; हेमलता देवी (55), पति सुरेंद्र यादव; ललिता देवी (45), पति गोरेलाल यादव, हलसी के प्रतापपुर; सोनी देवी (50), पति निरंजन सिंह, बड़हिया और संगीता देवी (40), पति रणवीर यादव, हलसी के प्रतापपुर शामिल हैं। अन्य मृतक की पहचान से संबंधित जानकारी प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट की जा रही है।

2019 के हादसे के बाद भी सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने अशोकधाम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। 12 अगस्त 2019 को भी अशोकधाम मंदिर में भगदड़ की घटना हो चुकी है। उस हादसे के बाद मंदिर परिसर के भीतर लोहे के पाइप से मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन बाहरी क्षेत्र में इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग का सहारा लिया गया था। सोमवार सुबह भारी दबाव के सामने यह व्यवस्था टिक नहीं सकी।

बताया जा रहा है कि सावन की सोमवारी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में करीब चार सौ जवानों को लगाया गया था। हालांकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसे के समय मंदिर के बाहरी हिस्से में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी दिखाई नहीं दे रहे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पहले हुई भगदड़ से सबक लेने के बावजूद भारी भीड़ वाले बाहरी मार्ग पर अधिक मजबूत इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

अशोकधाम मंदिर को श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां स्थापित विशाल शिवलिंग को पालकालीन माना जाता है और इसके जमीन की खुदाई के दौरान प्राप्त होने की मान्यता है। धार्मिक महत्व के कारण सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।