चार साल में 1.27 करोड़ बेडरोल गायब होने के आंकड़े से रेल मंत्रालय चिंतित
नई दिल्ली : ट्रेन के एसी कोच से कंबल, चादर और तौलिये लेकर उतरने वाले यात्रियों की मुश्किलें अब बढ़ सकती हैं। रेलवे को अपनी इस संपत्ति की चोरी से लगातार हो रहे भारी नुकसान ने रेल मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है। पिछले चार वर्षों में करोड़ों बेडरोल गायब होने के आंकड़े सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने अधिकारियों को ऐसी घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के लिए तत्काल व्यापक सुधार योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रेलवे की '52 हफ्तों में 52 सुधार' पहल की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एसी कोच से बेडरोल चोरी होने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का विशेष रूप से जिक्र किया। रेल मंत्री ने मंच पर मौजूद रेलवे के शीर्ष अधिकारियों से सीधे पूछा कि इस समस्या को रोकने के लिए ठोस कदम कब तक उठाए जाएंगे।
अधिकारियों ने इसके लिए रेल मंत्री से दो महीने का समय मांगा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस अवधि में बेडरोल चोरी की समस्या से निपटने के लिए मजबूत कानूनी और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी। रेलवे ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम करेगा, जिससे सरकारी संपत्ति लेकर ट्रेन से उतरने वालों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो।
इस बीच रेलवे बोर्ड बेडरोल और लिनन मैनेजमेंट को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक, रेलवे चादर, तौलिये और कंबल जैसी वस्तुओं में बेहद बारीक RFID यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन चिप लगाने की तैयारी कर रहा है। इस तकनीक की मदद से बेडरोल की डिजिटल निगरानी संभव हो सकेगी।
योजना के तहत कंबल और चादरों में RFID चिप लगाने के साथ ट्रेनों के निकास द्वार पर ऐसे सेंसर लगाए जा सकते हैं, जो सामान्य रूप से दिखाई नहीं देंगे। अगर रेलवे का कोई चिह्नित सामान ट्रेन से बाहर ले जाने की कोशिश की जाती है तो तकनीक के जरिए उसकी पहचान और निगरानी की जा सकेगी। रेलवे को उम्मीद है कि इससे बड़े पैमाने पर गायब हो रहे लिनन पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
कोविड महामारी के बाद जनवरी 2022 में एसी कोच में बेडरोल सेवा पूरी तरह बहाल की गई थी। इसके बाद से मई 2026 तक चोरी का जो आंकड़ा सामने आया है, उसने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है। इस अवधि में करीब 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी होने की बात सामने आई है।
सूचना का अधिकार यानी RTI के तहत 16 रेलवे जोन के 54 डिवीजन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच बेडरोल चोरी की घटनाओं में 56 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन चोरियों के कारण रेलवे में बेडरोल का ठेका संभालने वाले ठेकेदारों को करीब 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए रेलवे अब कई कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF को बेडरोल चोरी करने वालों को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार देने के प्रस्ताव पर भी मंथन किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि चलती ट्रेन से अलग-अलग स्टेशनों पर उतरने वाले संदिग्ध यात्रियों को बाद में ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है। इसी वजह से मौके पर कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
नई व्यवस्था में अगर कोई यात्री ट्रेन से उतरने से पहले रेलवे का बेडरोल वापस नहीं करता है तो RPF को उसके सामान की तलाशी लेने की छूट भी दी जा सकती है। रेलवे का मानना है कि इस तरह की सख्ती से सरकारी संपत्ति को निजी सामान समझकर साथ ले जाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत ट्रेन से तौलिया या चादर चुराना पहले से ही गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद बेडरोल गायब होने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी ने मौजूदा निगरानी और वसूली व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2015 में भी इस संबंध में गाइडलाइन जारी की थी। यात्रियों को सलाह दी गई थी कि वे अपने गंतव्य स्टेशन पर उतरने से कम से कम 30 मिनट पहले बेडरोल ट्रेन स्टाफ को सौंप दें। इसका उद्देश्य अंतिम समय में होने वाली परेशानी को रोकना और रेलवे के सामान की समय पर गिनती सुनिश्चित करना था।
फिलहाल रेलवे डिवीजन में तैनात बेडरोल अटेंडेंट को भी ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्हें यात्रियों से समय पर कंबल, चादर और तौलिये वापस लेने, गायब सामान की तुरंत जानकारी देने और ड्यूटी के दौरान पैनी नजर रखने के लिए लगातार काउंसिलिंग की जा रही है। अब दो महीने में तैयार होने वाली नई रूपरेखा के बाद एसी कोच से रेलवे का बेडरोल लेकर उतरने वालों के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई दोनों और सख्त हो सकती हैं।
