ईरान के फैसले से वैश्विक सप्लाई चेन फिर पटरी पर, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से बाजार में हलचल

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

ईरान ने एक अहम फैसला लेते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का ऐलान किया है, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में संघर्षविराम की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के व्यावसायिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया गया है। करीब डेढ़ महीने बाद इस अहम समुद्री मार्ग को चालू किए जाने से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम हुई है।

इस घोषणा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में तेज गिरावट आई और यह नीचे खिसककर करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड भी गिरावट के साथ लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। गैस की कीमतों में भी कमी देखी गई, जिससे वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना।

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल इस समुद्री गलियारे के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। फरवरी के अंत में इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आ गया था और कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था।

अब जब यह मार्ग दोबारा खुल गया है तो न केवल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है, बल्कि कीमतों पर भी दबाव कम होगा। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ गई है। यदि हालात इसी तरह सामान्य बने रहते हैं तो आने वाले समय में आम लोगों को भी महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।