तमिलनाडु ने 26.954 टीएमसी पानी का हिस्सा नहीं मिलने का लगाया आरोप
नई दिल्ली : कावेरी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जारी खींचतान अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गई है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने को लेकर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों का तत्काल पालन किया जाए। अदालत ने पानी की वास्तविक आपूर्ति पर भी नजर रखते हुए अगली सुनवाई तक नवीनतम स्थिति पेश करने को कहा है।
मामले में तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उसका कहना है कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होने के बावजूद उसे आवंटन के अनुरूप 26.954 टीएमसी पानी नहीं मिल रहा है। इसी शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्राधिकरण के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की याचिका पर अगली सुनवाई 24 अगस्त को तय की है। तब तक कर्नाटक की ओर से छोड़े गए पानी की ताजा स्थिति अदालत के सामने रखी जाएगी।
तमिलनाडु का आरोप है कि कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से अनुशंसित मात्रा उसकी जरूरत के मुकाबले कम है और वास्तविक रूप से मिल रहा पानी उससे भी काफी नीचे है।
तमिलनाडु के मुताबिक कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर बिलिगुंडलू में 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच वास्तविक जल प्रवाह केवल 158 से 550 क्यूसेक के बीच दर्ज किया गया। इसी आंकड़े को आधार बनाकर उसने पानी की आपूर्ति में कमी का मुद्दा अदालत के सामने उठाया है।
इस बीच केआरएस और काबिनी जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में हाल की बारिश के बाद पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। तमिलनाडु का कहना है कि तीन अगस्त तक कृष्णा राजा सागर, काबिनी, हरंगी और हेमावती जैसे कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों में कुल 77.537 टीएमसी पानी मौजूद था।
तमिलनाडु ने इसी जल भंडारण का हवाला देते हुए दावा किया है कि कर्नाटक के लिए उसके हिस्से का पानी छोड़ना संभव है। अब 24 अगस्त की सुनवाई में पानी की वास्तविक आपूर्ति के नए आंकड़ों के साथ दोनों राज्यों के पक्ष पर सुप्रीम कोर्ट की नजर रहेगी।