मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दौरे पर रोक लगाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया
नई दिल्ली : करूर भगदड़ मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि अदालत किसी मुख्यमंत्री के दौरे या सार्वजनिक कार्यक्रमों को नियंत्रित नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह तय करे कि मुख्यमंत्री को क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
सुनवाई के दौरान डीएमके की ओर से दलील दी गई कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय करूर जाकर भगदड़ के पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात करने वाले हैं, जिससे जांच प्रभावित होने और गवाहों पर असर पड़ने की आशंका है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि टीवीके प्रमुख विजय और उनके सहयोगी गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के दौरे और सार्वजनिक बयानों पर रोक लगाई जाए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों से मुख्यमंत्री की मुलाकात को गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या याचिकाकर्ता चाहता है कि न्यायालय मुख्यमंत्री की गतिविधियों और कार्यक्रमों को नियंत्रित करे। अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एक पक्ष अपनी बात रख सकता है तो दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का अधिकार है।
सुनवाई के दौरान डीएमके के वकील ने अदालत से कहा कि उनके खिलाफ एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है और उन्हें आरोपी के रूप में पेश करने की कोशिश हो रही है। इसके बावजूद अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों वाली याचिका वापस लेने की सलाह दी और संकेत दिया कि ऐसा नहीं करने पर याचिका खारिज की जा सकती है। अदालत के रुख के बाद डीएमके ने अपनी याचिका वापस लेने की सहमति दे दी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस मामले में तत्काल सुनवाई के लिए तैयार हो गया था।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 10 जुलाई को करूर जाने वाले हैं, जहां हाल ही में हुई भगदड़ में कम से कम 41 लोगों की मौत हुई थी। याचिका में मुख्यमंत्री, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों को मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने तथा सीबीआई जांच पूरी होने तक पीड़ित परिवारों से उनकी मुलाकातों को नियंत्रित करने की भी मांग की गई थी। इसमें टीवीके विधायक आधव अर्जुन के उस सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि करूर की घटना का "हिसाब चुकता करना" बाकी है और पिछली डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले की सीबीआई जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति गठित की थी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और एकल सदस्यीय जांच आयोग से जुड़े आदेशों पर रोक लगाते हुए तमिलनाडु सरकार को केंद्रीय एजेंसी की जांच में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया था।
पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 27 हजार लोग पहुंचे थे, जो अनुमानित संख्या से लगभग तीन गुना अधिक थे। पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री के पहुंचने में हुई सात घंटे की देरी को भी हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल बताया था।
