शहर के 20 स्थानों पर हुए 21 सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था


अहमदाबाद : वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर पुष्टि (कन्फर्मेशन) याचिका और दोषियों की अपीलों पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह निर्णय दिया।

अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने 18 फरवरी 2022 को अपना फैसला सुनाते हुए 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 दोषियों को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए गुजरात हाई कोर्ट में कन्फर्मेशन याचिका दायर की। वहीं सेशंस कोर्ट से दोषी ठहराए गए 48 आरोपियों ने भी अपनी सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

इस बहुचर्चित मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था। वर्ष 2009 में दर्ज इस केस की सुनवाई करीब 13 वर्षों तक चली, जिसके बाद सेशंस कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर के 20 अलग-अलग स्थानों पर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

जांच एजेंसियों ने शुरुआत में 99 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 82 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों का संबंध अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और भुज के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों से बताया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में करीब छह हजार दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए और 1,163 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सेशंस कोर्ट ने लगभग सात हजार पृष्ठों का फैसला सुनाया था, जबकि पूरे मामले की केस फाइल करीब 7.88 लाख पन्नों की बताई जाती है।