बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने 2013 के चर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। तेजपाल ने उच्चतम न्यायालय जाने की बात कही है

नई दिल्ली : तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 में उनकी कनिष्ठ महिला सहयोगी के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने दोषी ठहराया है।

न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंदकर की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के वर्ष 2021 के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत दोषी माना, जो विश्वास या अधिकार की स्थिति का दुरुपयोग कर दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित हैं।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह स्वयं को पीड़ित मानते हैं और इस निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि वह 62 वर्ष के हैं, उनका परिवार है और फिलहाल वह इस मामले में इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने केवल इतना कहा कि उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए फैसले को चुनौती दी जाएगी।

मामले की शुरुआत नवंबर 2013 में हुई थी। शिकायत के अनुसार, गोवा में आयोजित 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 नवंबर को होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी कनिष्ठ महिला सहयोगी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि घटना के समय वह तेजपाल के अधीन कार्यरत थी और उन्होंने अपने वरिष्ठ पद का अनुचित लाभ उठाया।

इस मामले की सुनवाई वर्ष 2017 में गोवा के मापुसा स्थित ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई थी। वर्ष 2021 में ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने उस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। अपील पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का निर्णय पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या तरुण तेजपाल के खिलाफ इस प्रकार का कोई अन्य मामला दर्ज है। इस पर बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ किसी अन्य एफआईआर, शिकायत या दुर्व्यवहार का मामला दर्ज नहीं है।

दोषसिद्धि के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कड़ी सजा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पीड़िता बार-बार विरोध करती रही, इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से दो दिनों तक उसका उत्पीड़न किया। उन्होंने अदालत से कहा कि इस मामले में ऐसा संदेश जाना चाहिए कि किसी भी महिला के 'ना' का अर्थ हमेशा 'ना' ही होता है और उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई भी कृत्य कानून की नजर में गंभीर अपराध है।

अब इस मामले में सजा के प्रश्न पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, तरुण तेजपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे।