अस्पताल, पुलिस, न्यायपालिका और बाल संरक्षण संस्थाओं तक बढ़ेगा समन्वय, 10 सितंबर को दिल्ली में कार्यशाला

नई दिल्ली : किसी बच्चे को परिवार देना केवल भावनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि उसके अधिकार, पहचान और भविष्य से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी भी है। इसी संदेश को देशभर में पहुंचाने और गैरकानूनी तरीके से बच्चों को गोद लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने दत्तक ग्रहण जागरूकता 2026 के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इस वर्ष अभियान का मुख्य संदेश ‘वैधानिक दत्तक ग्रहण, सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य’ रखा गया है। इसके साथ अवैध दत्तक ग्रहण रोकने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत कार्यरत सीएआरए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना सक्सेना ने दूरदर्शन के एक सुबह के सीधे प्रसारण वाले कार्यक्रम में अभियान के विषय का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही वैधानिक, सुरक्षित, पारदर्शी और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण व्यवस्था को लेकर पूरे वर्ष चलने वाले जागरूकता अभियान की शुरुआत हो गई।

सीएआरए का जोर इस बात पर है कि दत्तक ग्रहण को दो व्यक्तियों या परिवारों के बीच होने वाले निजी समझौते के रूप में नहीं देखा जाए। अनाथ, परित्यक्त या परिवार की ओर से विधिवत सौंपे गए बच्चे को गोद लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर बच्चे की पहचान, अधिकार और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

भावना सक्सेना ने अभियान की शुरुआत के दौरान दत्तक ग्रहण में किसी भी तरह के गैरकानूनी रास्ते से बचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण कोई आसान या त्वरित रास्ता नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। सीएआरए और निर्धारित कानूनी माध्यमों से होने वाली प्रक्रिया अनाथ, परित्यक्त अथवा सौंपे गए बच्चों की गरिमा, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण मिलना चाहिए।

अवैध दत्तक ग्रहण के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए सीएआरए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय मजबूत कर रहा है। प्राधिकरण का मानना है कि केवल केंद्रीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं होगा। राज्य, जिला और समुदाय के स्तर तक लोगों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देने और संबंधित संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

इस बार जागरूकता कार्यक्रम को नवंबर महीने तक सीमित रखने के बजाय पूरे वर्ष चलाने की तैयारी की गई है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दत्तक ग्रहण जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने, अवैध दत्तक ग्रहण के मामलों की पहचान करने और बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देने पर जोर रहेगा।

अभियान का दायरा भी व्यापक रखा गया है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाइयां, विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियां और बाल देखभाल संस्थानों के साथ पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, न्यायपालिका और कानूनी सेवा प्राधिकरण को जोड़ा जाएगा। अस्पतालों, नर्सिंग होम, चिकित्सकों, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं, नागरिक संगठनों तथा मीडिया और डिजिटल माध्यमों की भी भागीदारी होगी।

राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 10 सितंबर को दिल्ली सचिवालय में विशेष दत्तक ग्रहण जागरूकता कार्यशाला आयोजित की जाएगी। सीएआरए दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और संबंधित अधिकारियों के सहयोग से इसका आयोजन करेगा। इसमें देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तक कानूनी व्यवस्था के माध्यम से सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास पहुंचाने में विभिन्न संस्थाओं की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाएगी।

कार्यशाला में अभिभावकों से अलग पाए गए बच्चों की समय पर सूचना देने, बच्चे को कानूनी रूप से सौंपने की प्रक्रिया और उसे दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी। भावी दत्तक माता-पिता को भी यह समझाने का प्रयास होगा कि बच्चे को सीधे किसी व्यक्ति या परिवार से लेना कानूनी दत्तक ग्रहण का विकल्प नहीं है।