वी.डी. सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर संभाली राज्य की कमान, तिरुवनंतपुरम में शक्ति प्रदर्शन जैसा दिखा समारोह

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सत्ता में वापसी के साथ वी.डी. सतीशन ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार की कमान संभाल ली। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही केरल में यूडीएफ शासन की औपचारिक शुरुआत हो गई।

मुख्यमंत्री के साथ नई कैबिनेट के मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया। मंत्रिमंडल में कांग्रेस के नेताओं के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और यूडीएफ के अन्य सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। नई सरकार में विभिन्न दलों को शामिल कर गठबंधन संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दी।

शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी मौजूद रहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई वरिष्ठ नेता मंच पर दिखाई दिए। समारोह को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खास उत्साह देखने को मिला और इसे दक्षिण भारत में पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक वापसी माना जा रहा है।

नई सरकार में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें रमेश चेन्निथला, सन्नी जोसेफ, के. मुरलीधरन, ए.पी. अनिल कुमार, पी.सी. विष्णुनाथ, टी. सिद्दीकी, बिंदु कृष्णा, के.ए. तुलसी, रोजी एम. जॉन, एम. लिजू और ओ.जे. जनीश शामिल हैं।

वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की ओर से पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन. शमसुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। इसके अलावा यूडीएफ के अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें केरल कांग्रेस जोसेफ गुट के मॉन्स जोसेफ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के शिबू बेबी जॉन, केरल कांग्रेस जैकब गुट के अनूप जैकब और सी.पी. जॉन शामिल हैं।

इस बार के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ को स्पष्ट जनादेश मिला। करीब एक दशक तक विपक्ष में रहने के बाद गठबंधन ने जोरदार वापसी की है। चुनाव में यूडीएफ को उल्लेखनीय वोट प्रतिशत हासिल हुआ, जिसके चलते विधानसभा में उसकी सीटों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत केरल की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

नई सरकार के सामने अब राज्य में विकास, रोजगार, वित्तीय प्रबंधन और राजनीतिक स्थिरता जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी। हालांकि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान यूडीएफ नेताओं ने भरोसा जताया कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेगी।