पांच साल में 29 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े, पुनरीक्षण में 2.32 करोड़ नाम शामिल और 2.03 करोड़ नाम हटाए गए
LUCKNOW : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। वर्ष 2026 की पंचायत चुनाव मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 मतदाता दर्ज किए गए हैं। यह संख्या वर्ष 2021 की पंचायत मतदाता सूची में दर्ज 12 करोड़ 29 लाख 50 हजार 52 मतदाताओं की तुलना में 29 लाख 1 हजार 518 अधिक है। अंतिम सूची जारी होने के साथ ही पंचायत चुनाव की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर नए मतदाताओं को जोड़ा गया और मृत, स्थानांतरित अथवा अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पुनरीक्षण प्रक्रिया में 2 करोड़ 32 लाख 24 हजार 805 नए नाम सूची में शामिल किए गए, जबकि 2 करोड़ 3 लाख 23 हजार 287 नाम हटाए गए। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश की कुल मतदाता संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
इस बार मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया। इसी प्रक्रिया में करीब 1.41 करोड़ नाम सूची से हटाए गए तथा मतदाताओं की पहचान को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नौ अंकों की पहचान प्रणाली को भी लागू किया गया है। चुनावी प्रक्रिया को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जौनपुर प्रदेश का सबसे बड़ा मतदाता जिला बनकर सामने आया है। यहां कुल 36 लाख 97 हजार 376 मतदाता दर्ज किए गए हैं। प्रयागराज में 34 लाख 95 हजार 203, सीतापुर में 31 लाख 18 हजार 29, गोरखपुर में 29 लाख 63 हजार 142 तथा लखीमपुर खीरी में 28 लाख 87 हजार 290 मतदाता हैं। इसके अलावा हरदोई में 28.73 लाख, गाजीपुर में 28.11 लाख, बलिया में 26.97 लाख, गोंडा में 26.74 लाख तथा बाराबंकी में 23.20 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए हैं।
मतदाता वृद्धि के मामले में लखीमपुर खीरी प्रदेश में सबसे आगे रहा है। यहां 1 लाख 38 हजार 223 नए मतदाता बढ़े हैं। बलिया में 1 लाख 60 हजार 376, देवरिया में 1 लाख 26 हजार 771, सिद्धार्थनगर में 1 लाख 23 हजार 162 तथा कुशीनगर में 1 लाख 20 हजार 11 मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी लखनऊ में भी मतदाता संख्या बढ़ी है। यहां अंतिम सूची के अनुसार कुल 10 लाख 85 हजार 80 मतदाता दर्ज किए गए हैं और पुनरीक्षण के बाद 30 हजार 51 नए मतदाता जुड़े हैं।
दूसरी ओर कुछ जिलों में मतदाताओं की संख्या में कमी भी दर्ज की गई है। आगरा में 23 हजार 294, आजमगढ़ में 60 हजार 347, गाजीपुर में 94 हजार 757, मैनपुरी में 93 हजार 207 तथा महोबा में 16 हजार 962 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई है। खास बात यह है कि गाजीपुर कुल मतदाताओं की संख्या के लिहाज से प्रदेश के बड़े जिलों में शामिल है, लेकिन पुनरीक्षण के बाद वहां मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी भी सामने आई है।
उधर, पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाने के कारण प्रदेश में पहली बार 57 हजार 694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाया गया है। सरकार ने इनके कार्यों और अधिकारों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। निवर्तमान प्रधान 27 मई से प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाल चुके हैं।
नए शासनादेश के अनुसार अब कोई भी प्रशासक अपनी ओर से नया विकास कार्य शुरू नहीं कर सकेगा। किसी भी नए कार्य के लिए उसे जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजना होगा। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही नया कार्य शुरू कराया जा सकेगा। यानी ग्राम पंचायतों में अब नए विकास कार्यों पर अंतिम निर्णय डीएम स्तर से लिया जाएगा।
हालांकि प्रशासक बनाए जाने से पहले स्वीकृत, अनुमोदित, निर्माणाधीन, मरम्मताधीन अथवा पूर्ण हो चुके कार्यों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। ऐसे कार्यों का भौतिक और तकनीकी मूल्यांकन कराकर पूर्व की तरह भुगतान किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद अब पंचायत चुनाव की तैयारियां और तेज होने की संभावना है। बढ़ी हुई मतदाता संख्या, नए वोटरों की बड़ी भागीदारी और ग्राम पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था लागू होने से इस बार का पंचायत चुनाव कई मायनों में अलग और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
