व्हाइट हाउस के बाहर 100 से अधिक लोगों का प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी खत्म करने और पाक फौज को नागरिक इलाकों से हटाने की मांग
नई दिल्ली : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में वर्षों से सुलग रहा असंतोष एक बार फिर हिंसा और खूनखराबे में बदल गया है। रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की ओर से नागरिकों के खिलाफ अभियान चलाए जाने के बाद हालात बेकाबू हो गए। शहर के न्यू बस टर्मिनल के पास स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प शुरू हो गई। इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की फायरिंग में छह नागरिकों की मौत हो गई। ताजा हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और इस्लामाबाद के खिलाफ लोगों का गुस्सा लगातार गहराता जा रहा है।
बलोच-सुधनोटी क्षेत्र में मारे गए लोगों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अरसलान अकबर और वाजिद हयात शामिल बताए गए हैं। वाजिद हयात की मौत रावलाकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर हुई। नागरिकों की मौत के बाद स्थानीय आबादी में भारी आक्रोश है और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
रावलाकोट में हुए इस खूनखराबे से ठीक एक दिन पहले PoK के लोगों की चीख और आक्रोश अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी तक पहुंचा था। अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी जन्मभूमि गंभीर मानवीय संकट से गुजर रही है और लोगों को पकड़कर मौत के घाट उतारा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति समेत दुनिया के नेताओं से PoK के हालात पर तत्काल ध्यान देने की अपील की। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तानी फौज की दमनकारी कार्रवाई को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कदम उठाया जाए। व्हाइट हाउस के बाहर जुटे 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी फौज के खिलाफ नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पाकिस्तानी सेना को तत्काल PoK के नागरिक इलाकों से हटाया जाए। निहत्थे नागरिकों पर गोलियां चलाने के मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करे और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
PoK में लंबे समय से जारी इंटरनेट बंदी का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से उठा। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि संचार सेवाओं पर पाबंदी के कारण करीब 40 लाख लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। उनका आरोप है कि इंटरनेट बंद कर क्षेत्र के वास्तविक हालात और सुरक्षाबलों की कार्रवाई की जानकारी दुनिया तक पहुंचने से रोकी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने भारत से भी हस्तक्षेप कर लोगों की जान बचाने और मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद करने की अपील की है। इसके साथ ही नियंत्रण रेखा यानी LoC को पुंछ और डोडा सेक्टर के रास्ते खोलने की मांग की गई है, ताकि प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाएं और अन्य मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके।
ताजा हिंसा के बीच PoK की गंभीर आर्थिक स्थिति भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। वर्ष 2025 में नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक क्षेत्र की करीब 66 प्रतिशत आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। इसके बावजूद 57 प्रतिशत से अधिक परिवार खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं। अध्ययन में PoK की करीब 29 प्रतिशत आबादी के कुपोषित होने की बात कही गई है।
पहाड़ी इलाकों में स्थिति और भी गंभीर बताई गई है। अध्ययन के अनुसार इन क्षेत्रों में करीब 90 प्रतिशत परिवार खाद्य संकट से प्रभावित हैं। इससे साफ है कि राजनीतिक असंतोष और सुरक्षाबलों की कार्रवाई के साथ ही स्थानीय आबादी भोजन और आजीविका के गंभीर संकट का भी सामना कर रही है।
स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। पाकिस्तान की वॉलंटरी नेशनल रिव्यू रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के 39 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध शारीरिक विकास यानी स्टंटिंग का शिकार हैं। वहीं मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 104 है।
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों और नागरिकों की मौत पर भारत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि मौजूदा हालात पाकिस्तान की ओर से वर्षों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण का परिणाम हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में जारी प्रदर्शन दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और पाकिस्तान के अवैध तथा जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।
भारत ने पाकिस्तान पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकने, पुलिस की बर्बरता और इंटरनेट बंदी लागू करने का भी आरोप लगाया। रणधीर जायसवाल ने कहा कि स्थानीय लोगों की वास्तविक शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान ने महिलाओं और बच्चों तक के खिलाफ अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया। भोजन और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकी गई, इंटरनेट बंद किया गया और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग हुआ, जिससे दुखद मौतें हुईं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की बात कही है। रावलाकोट में छह नागरिकों की मौत, व्हाइट हाउस के बाहर PoK के लोगों का प्रदर्शन और भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हालात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
