ऑपरेशन CY-Vajra के तहत नहटौर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, साइबर ठगी में शामिल छह आरोपी गिरफ्तार
बिजनौर : कभी मोटे मुनाफे वाले निवेश का सपना, कभी अनजान नंबर से फर्जी कॉल और कभी एचएसआरपी नंबर प्लेट के नाम पर जरूरी प्रक्रिया का झांसा। साइबर ठग हर बार चेहरा और तरीका बदलते रहे, लेकिन मकसद एक ही था लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी रकम हड़पना। नहटौर पुलिस ने ऐसे ही एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन CY-Vajra के तहत पुलिस ने 13 जुलाई 2026 को यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से साइबर अपराधों को अंजाम दे रहे थे और अलग-अलग तरीकों से लोगों को भरोसे में लेकर ठगी का शिकार बनाते थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य निवेश स्कैम के जरिए लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देते थे। लोगों का विश्वास जीतने के बाद उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता और फिर रकम ऐंठ ली जाती थी। इसी तरह फर्जी कॉल के माध्यम से भी लोगों से संपर्क कर उन्हें भ्रमित किया जाता था।
एचएसआरपी नंबर प्लेट के नाम पर ठगी भी गिरोह के प्रमुख तरीकों में शामिल थी। आरोपी नंबर प्लेट से जुड़ी प्रक्रिया का झांसा देकर लोगों को निशाना बनाते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जाता था, जिससे पूरी प्रक्रिया पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे और पीड़ित आसानी से ठगों की बातों पर विश्वास कर लें।
पुलिस के अनुसार गिरोह का दायरा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। आरोपी फर्जी दस्तावेजों और साइबर माध्यमों का इस्तेमाल कर देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। संगठित तरीके से चल रहे इस नेटवर्क के खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और साइबर अपराध की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
छह आरोपियों की गिरफ्तारी को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी के जरिए कितनी रकम हासिल की। नेटवर्क की गहराई से जांच के बाद साइबर ठगी से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।
