क्वांटम तकनीक को बताया भविष्य की बड़ी ताकत, बच्चों से जिज्ञासा और लगन बनाए रखने की अपील, इंटरैक्टिव सेशन में गणित और विज्ञान से जुड़े सवालों के दिए सहज जवाब

पूर्वी चम्पारण : छोटे शहरों में पढ़ने वाले बच्चों के सपने भी दुनिया जितने बड़े हो सकते हैं, जरूरत है उन्हें सही दिशा, लगातार जिज्ञासा और सीखने का जुनून देने की। रविवार को घोड़ासहन के ज्ञान ज्योति विद्यालय में यही संदेश लेकर पहुंचे युवा अमेरिकी वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर डॉ. सुबोर्नो। उनके साथ सीधे संवाद का अवसर मिलने से विद्यार्थियों में खास उत्साह देखने को मिला। विज्ञान, गणित और भविष्य की तकनीक पर हुई चर्चा ने पूरे कार्यक्रम को प्रेरक और यादगार बना दिया।

विद्यालय पहुंचने पर छात्र-छात्राओं ने शिव स्तुति और स्वागत गीत प्रस्तुत कर उनका अभिनंदन किया। विद्यालय के निदेशक प्रेमचंद प्रसाद ने चंपा का पौधा भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि घोड़ासहन जैसे क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित वैज्ञानिक का आगमन विद्यार्थियों के लिए बड़ा अवसर है और इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति नई रुचि पैदा होगी।

अपने संबोधन की शुरुआत नमस्ते इंडिया के साथ करते हुए प्रो. सुबोर्नो ने घोड़ासहन आने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने यहां के सांस्कृतिक वातावरण और शिक्षा के प्रति उत्साह की सराहना की। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। यदि विद्यार्थी सवाल पूछने की आदत बनाए रखें, कठिन विषयों को समझने की कोशिश करें और लक्ष्य के प्रति लगातार मेहनत करें तो वे वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।

विज्ञान के भविष्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने क्वांटम मैकेनिक्स और क्वांटम तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि पिछली सदी में क्वांटम सिद्धांत ने विज्ञान और तकनीक की सोच बदल दी थी और आने वाले वर्षों में क्वांटम तकनीक कई क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

कार्यक्रम का सबसे रोचक हिस्सा प्रश्नोत्तर सत्र रहा। पत्रकारों के साथ-साथ विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी गणित, क्वांटम मैकेनिक्स और आधुनिक विज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। छात्रा प्रीति चौहान सहित कई बच्चों ने अपनी जिज्ञासाएं सामने रखीं। प्रो. सुबोर्नो ने कठिन विषयों को सरल उदाहरणों के जरिए समझाते हुए विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया।

अभिभावकों और शिक्षकों ने कार्यक्रम को बच्चों के लिए प्रेरणादायी अनुभव बताया। उनका मानना था कि छोटे शहरों के विद्यार्थियों को ऐसे व्यक्तित्वों से सीधे बातचीत का अवसर मिलने से उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिक के पिता रशीगुल बारी, प्रणेश कुमार, प्रो. के.के. झा, पंकज कुमार, विद्यालय की प्राचार्या सुमिता दास, सुमित कुमार, अवध किशोर यादव, रंजीत श्रीवास्तव, बी.के. प्रसाद, अक्षय कुमार, मनोज कुमार और रीमा श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।