गणेश धर द्विवेदी
देवरिया भाजपा की नई जिला कार्यसमिति की सूची सामने आते ही संगठन के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है। जिस कैडर-बेस्ड पार्टी की पहचान जमीनी पकड़ और अनुशासन से होती थी, वहां अब पदों की रेवड़ी बांटने का अनोखा खेल देखने को मिल रहा है। सूची इतनी भारी-भरकम हो चुकी है कि पार्टी के पुराने, निष्ठावान और जनाधार वाले चेहरे इस भीड़ में कहीं गुम हो गए हैं।
पदवी की भरमार, रुतबे में गिरावट
कार्यसमिति की सूची के पहले ही पन्ने पर आठ जिला उपाध्यक्ष और आठ जिला मंत्री नियुक्त कर दिए गए हैं। जब हर मोहल्ले और नुक्कड़ पर एक उपाध्यक्ष या मंत्री घूमता नजर आएगा, तो इन गरिमामय पदों का वजन और रुतबा अपने आप घटकर साधारण हो जाएगा। यह जंबो कार्यकारिणी संगठन की मजबूती के लिए कम और आपसी गुटबाजी को शांत करने के लिए अधिक प्रतीत होती है।


डिजिटल सेना का तमाशा
सोशल मीडिया और मीडिया विभाग में भी आधा दर्जन संयोजकों व सह-संयोजकों की पूरी फौज तैनात कर दी गई है। जब कमान संभालने वाले इतने सारे नेता होंगे, तो जमीनी स्तर पर काम कौन करेगा और अभियानों को आगे कौन बढ़ाएगा?
साहब बने सभी, कार्यकर्ता नदारद
इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा मायूसी उन समर्पित कार्यकर्ताओं में है, जो रैलियों में दरी बिछाते हैं और झंडा उठाते हैं। सबको विजिटिंग कार्ड थमाकर पदाधिकारी बना दिया गया है, लेकिन जब हर कोई हुक्म चलाने की मुद्रा में आ जाएगा, तो धूप में पसीना बहाने वाला असली कार्यकर्ता ढूंढने से भी नहीं मिलेगा।
देवरिया भाजपा ने यह जता दिया है कि जब कार्यकुशलता की जगह केवल 'संख्या' को तवज्जो दी जाती है, तो बड़े कद के नेता भी महज कागजी आंकड़ों में सिमट कर रह जाते हैं।