70वीं BPSC से चयनित अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने दिया सेवा, ईमानदारी और जवाबदेही का मंत्र
पटना : सरकारी दफ्तर की किसी फाइल पर किया गया एक हस्ताक्षर देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन वही हस्ताक्षर किसी गरीब परिवार को राहत दिला सकता है, किसी युवा के भविष्य का रास्ता खोल सकता है और किसी गांव की तस्वीर बदल सकता है। 70वीं BPSC परीक्षा के जरिए चयनित करीब 2000 अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जब यह बात कही तो उनका संदेश साफ था-आज नियुक्ति पत्र मिल रहा है, लेकिन असली परीक्षा उस दिन से शुरू होगी जब आपकी कलम से जनता की जिंदगी से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।
पटना में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नवनियुक्त अधिकारियों को प्रशासनिक सेवा के अधिकारों से ज्यादा उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी केवल पद, अधिकार और सुविधाएं हासिल करने का माध्यम नहीं है। प्रशासनिक सेवा में आने का अर्थ जनता के बीच रहकर उसकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 70वीं BPSC के माध्यम से बड़ी संख्या में अधिकारियों का चयन बिहार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब इन अधिकारियों के कंधों पर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को समझाया कि आने वाले दिनों में उनके सामने हजारों फाइलें आएंगी। हर फाइल के पीछे किसी व्यक्ति, परिवार, गांव या समाज की कोई जरूरत जुड़ी हो सकती है। इसलिए हस्ताक्षर करने से पहले यह समझना जरूरी होगा कि उस फैसले का आम आदमी की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने से नवनियुक्त अधिकारियों और उनके परिवारों के जीवन में निश्चित रूप से बदलाव आएगा, लेकिन इससे भी बड़ी जिम्मेदारी यह है कि उनकी वजह से कितने दूसरे परिवारों की जिंदगी बेहतर होती है। प्रशासन में बैठे अधिकारी का एक सही फैसला किसी जरूरतमंद को उसका अधिकार दिला सकता है, किसी युवा के लिए अवसर पैदा कर सकता है और वर्षों से किसी सरकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे व्यक्ति को राहत दे सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ईमानदारी और निर्भीकता के साथ काम करने की नसीहत देते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा के दौरान कई तरह की परिस्थितियां और दबाव सामने आएंगे। ऐसे समय में अधिकारी को कानून, नियम और जनहित को सर्वोपरि रखकर फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और भयमुक्त प्रशासन ही जनता का भरोसा मजबूत कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पद मिलने के बाद अधिकारी के व्यवहार में अहंकार नहीं आना चाहिए। सरकारी पद जितना अधिकार देता है, उससे कहीं ज्यादा जवाबदेही भी तय करता है। आम आदमी जब किसी सरकारी कार्यालय में अपनी समस्या लेकर पहुंचे तो उसकी बात सुनी जाए और नियमानुसार समाधान की कोशिश हो। अधिकारी जनता से जितना जुड़ेंगे, प्रशासनिक व्यवस्था उतनी ही प्रभावी होगी।
उन्होंने बिहार के विकास को प्रशासनिक कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि योजनाएं बनाने के साथ उनका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। गांव से लेकर शहर तक विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रशासन ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करेगा तो बिहार की विकास यात्रा और तेज होगी।
मुख्यमंत्री ने रोजगार और सुरक्षा को भी राज्य के विकास का अहम आधार बताया। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे। इसके लिए सरकार की नीतियों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।
करीब 2000 नवनियुक्त अधिकारियों के लिए यह समारोह केवल नियुक्ति पत्र हासिल करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि आने वाली जिम्मेदारियों का पहला संदेश भी बना। मुख्यमंत्री ने उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि कुर्सी और पद स्थायी पहचान नहीं हैं, बल्कि उस कुर्सी पर बैठकर लिए गए फैसले ही एक अधिकारी की असली पहचान बनाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का संदेश आखिर तक एक ही बिंदु पर केंद्रित रहा-सरकारी सेवा को सिर्फ नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखें। क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी की कलम जब ईमानदारी और जनहित के लिए चलती है तो उसका एक हस्ताक्षर केवल एक फाइल आगे नहीं बढ़ाता, बल्कि किसी परिवार की जिंदगी भी आगे बढ़ा सकता है।

