जर्जर तटबंध और अधूरे निर्माण ने बढ़ाई चिंता। डुब्बाघाट में जलस्तर खतरे के निशान से 1.07 मीटर नीचे
पूर्वी चंपारण : नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब पूर्वी चंपारण में दिखाई देने लगा है। जिले से होकर गुजरने वाली बागमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर, जर्जर तटबंधों और अधूरे निर्माण कार्यों ने संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस वर्ष भी हजारों परिवारों को बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ सकता है। खासकर मोतिहारी, पताही, फेनहारा, मधुबन, शिवहर और सीतामढ़ी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का अधूरा निर्माण लोगों की चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। इसके अलावा देवापुर से बेलवा जाने वाले मार्ग के समीप बागमती तटबंध के कई हिस्सों की स्थिति भी लोगों को डरा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तटबंध की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण को लेकर कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में कमजोर तटबंध किसी भी समय खतरा पैदा कर सकते हैं। यदि नदी का दबाव बढ़ा तो आसपास के गांवों में पानी घुसने और बड़े पैमाने पर नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, शिवहर के डुब्बाघाट में बागमती नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से 1.07 मीटर नीचे दर्ज किया गया है। हालांकि नदी अभी खतरे के स्तर से नीचे बह रही है, लेकिन नेपाल में लगातार जारी बारिश को देखते हुए विशेषज्ञ आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ने की संभावना जता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही वर्षा का सीधा असर बागमती के प्रवाह पर पड़ता है और स्थिति तेजी से बदल सकती है।
संभावित बाढ़ को लेकर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के बीच चिंता का माहौल है। किसानों को खेतों में लगी फसलों के डूबने का डर सता रहा है, जबकि गरीब और मजदूर परिवारों को घर-बार उजड़ने की आशंका परेशान कर रही है। हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलने वाले लोग इस बार भी अनिश्चितता और भय के बीच दिन गुजार रहे हैं।
इधर, जिला प्रशासन और बागमती प्रमंडल की टीमें तटबंधों की निगरानी में जुटी हुई हैं।संवेदनशील स्थलों पर विशेष नजर रखी जा रही है तथा संबंधित अधिकारियों को लगातार सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निगरानी और निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि तटबंधों की तत्काल मरम्मत, कमजोर स्थलों का सुदृढ़ीकरण और अधूरे निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करना जरूरी है। यदि तैयारियों में देरी हुई तो बढ़ता जलस्तर बड़ी चुनौती बन सकता है।
जिला अधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कहा कि तटबंधों के निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्यों को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पूर्व तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए भी कहा गया है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और घबराने की बजाय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। डीएम ने दावा किया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

