शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी। हाईकोर्ट जज की अगुवाई में बनाई जाएगी उच्चस्तरीय समिति
पटना : स्वतंत्रता दिवस पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के युवाओं और छात्रों के लिए बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार गांधी मैदान में तिरंगा फहराने पहुंचे सम्राट चौधरी ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। खास बात यह है कि इस समिति का नेतृत्व हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश करेंगे। समिति शिक्षा व्यवस्था से लेकर स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं तक की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर सरकार को सुधार के सुझाव देगी।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में आयोजित मुख्य राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बिहारवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने बिहार के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से युवाओं की चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की भावनाओं के साथ परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया है।
समिति राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के साथ विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की परीक्षाओं के संचालन का भी अध्ययन करेगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता किस तरह और मजबूत की जा सकती है, इस पर भी समिति सुझाव देगी। सरकार का प्रयास ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिस पर छात्रों और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि बिहार को विकास और सुशासन के नए दौर में आगे ले जाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
गांधी मैदान से मुख्यमंत्री ने युवाओं, छात्रों, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों को सरकार की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण भागीदार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के प्रत्येक वर्ग की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर काम कर रही है और आने वाले समय में विकास योजनाओं को और तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा।
शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं लंबे समय से बिहार के लाखों युवाओं से सीधे जुड़ा संवेदनशील मुद्दा रही हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मंच से हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अगुवाई में उच्चस्तरीय समिति बनाने की घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि समिति का गठन कब होता है, उसे किन-किन विषयों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है और उसकी सिफारिशों के आधार पर सरकार परीक्षा तथा शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव करती है।
समारोह में मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। गांधी मैदान में पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता दिवस का उत्साह दिखाई दिया।
