अब पूरे बिहार में चलेगा बाल श्रम मुक्त अभियान, डीजीपी विनय कुमार ने सरदार पटेल भवन में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को बाल श्रम के खिलाफ शपथ दिलाई
नीरज कुमार, पटना
बिहार में अब अपराध और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मासूम बच्चों के सुरक्षित भविष्य की लड़ाई भी पुलिस की प्राथमिकता बनने जा रही है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार के नेतृत्व में पूरे राज्य में बाल सुरक्षा अधिनियम के तहत व्यापक स्तर पर 'बाल श्रम मुक्त अभियान' चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सभी जिलों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और पुलिस महकमे को इस मिशन में पूरी संवेदनशीलता, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ जुटने को कहा गया है।
शुक्रवार को पटना स्थित पुलिस मुख्यालय के सरदार पटेल भवन सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान डीजीपी विनय कुमार ने वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को बाल श्रम के खिलाफ एकजुट होकर काम करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम मुक्त राष्ट्र का निर्माण केवल कानून लागू करने का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज और व्यवस्था की साझा जिम्मेदारी है। पुलिस को अब इस दिशा में अपनी सामाजिक भूमिका भी पूरी निष्ठा के साथ निभानी होगी।
कार्यक्रम के दौरान डीजीपी का भावुक और मानवीय पक्ष भी सामने आया। उन्होंने कहा कि जब वह छोटे-छोटे बच्चों को देखते हैं, जिनके हाथों में पढ़ाई की उम्र में किताब और कलम होनी चाहिए, लेकिन वे कबाड़ चुनते, मजदूरी करते या छोटी-छोटी दुकानों में काम करते दिखाई देते हैं, तो उनका दिल द्रवित हो उठता है। उन्होंने कहा कि कई बार रात के सन्नाटे में फुटपाथों पर ठंड और असुरक्षा के बीच सोते बच्चों को देखकर मन व्यथित हो जाता है। ऐसे दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
डीजीपी ने कहा कि सरकार बच्चों के भरण-पोषण, संरक्षण और निःशुल्क शिक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचे, इसके लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और प्रभावी हस्तक्षेप आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार पुलिस अब ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराने और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगी।
इस अभियान के तहत बिहार के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में बाल सुरक्षा अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने, विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन करने और नियमित अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि बाल श्रम से जुड़े मामलों में अब विशेष निगरानी रखी जाएगी और प्रत्येक जिले में कार्रवाई की समीक्षा भी होगी।
होटल, ढाबों, गैरेज, कार्यशालाओं, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी। जहां भी बच्चों से काम कराए जाने की सूचना मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी। बाल मजदूरी कराने वाले संचालकों, नियोक्ताओं और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर नरमी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरदार पटेल भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों को यह भी शपथ दिलाई गई कि वे बच्चों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएंगे, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएंगे और बाल श्रम उन्मूलन के अभियान को पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएंगे। अधिकारियों से कहा गया कि इस अभियान को महज कानूनी कार्रवाई न समझें, बल्कि इसे समाज के भविष्य को संवारने वाले मिशन के रूप में देखें।
अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रेस्क्यू किए गए बच्चों का समुचित पुनर्वास भी है। पुलिस और प्रशासन के समन्वय से ऐसे बच्चों के रहने, खाने, स्वास्थ्य सुरक्षा, संरक्षण और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्हें केवल श्रम से मुक्त कराना ही नहीं, बल्कि बेहतर जीवन और सुरक्षित भविष्य देना भी इस अभियान का लक्ष्य होगा।
इस उच्चस्तरीय बैठक और शपथ ग्रहण कार्यक्रम के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि बिहार पुलिस अब केवल पारंपरिक अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगी। समाज के सबसे कमजोर और बेबस हिस्से यानी बचपन को सुरक्षित करने के लिए पुलिस का यह नया स्वरूप राज्य में बड़े सामाजिक बदलाव की नींव रख सकता है।

