हत्या के बाद आरोपों का ऐसा जाल बुना गया कि अपने ही भाई को फंसाने की कोशिश की गई, लेकिन वैज्ञानिक जांच ने पूरी सच्चा सामने ला दी
नीरज कुमार, पूर्वी चंपारण : एक मां अपने बच्चे को जन्म देने से लेकर उसके पैरों पर खड़ा होने तक न जाने कितनी बार खुद टूटती है, लेकिन उसे कभी टूटने नहीं देती। कभी अपने हिस्से का निवाला छोड़ देती है तो कभी रातभर जागकर उसकी सलामती की दुआ करती है। उसके लिए बेटा ही उसकी सबसे बड़ी दौलत होता है। लेकिन पूर्वी चंपारण से आई एक दर्दनाक घटना ने इस सबसे पवित्र रिश्ते को ही लहूलुहान कर दिया। जिस मां ने अपनी ममता से बेटे की जिंदगी संवारी, उसी मां की जिंदगी कथित तौर पर चंद टुकड़ों की जमीन की लालच में खत्म कर दी गई। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए ऐसा सवाल है, जिसका जवाब हर संवेदनशील इंसान तलाश रहा है।
मृतका की पहचान 65 वर्षीय पार्वती देवी, पत्नी स्वर्गीय जीउत महतो, निवासी वार्ड संख्या-12, सरैया बदुरहा, थाना डुमरियाघाट के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार सोमवार की देर रात करीब एक बजे वह अपने घर में गहरी नींद में थीं। उन्हें शायद इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस घर को उन्होंने वर्षों की मेहनत और त्याग से बसाया, उसी घर में उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी। इसी दौरान उनके सिर पर गड़ासे से हमला किया गया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
सुबह होते ही घर मातम में डूब गया, लेकिन दुख के बीच आरोपों का सिलसिला भी शुरू हो गया। छोटे बेटे धर्मदेव महतो ने अपने बड़े भाई कमलदेव महतो पर जमीन के विवाद में मां की हत्या करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कमलदेव की पत्नी सुनपति देवी ने धर्मदेव महतो, उसके चाचा सुंदरजीत महतो और चचेरे भाई राकेश कुमार पर हत्या का आरोप लगाया। विरोधाभासी बयानों ने पूरे मामले को उलझा दिया, जिसके बाद पुलिस ने सभी संबंधित लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में डुमरियाघाट थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉड और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को बुलाया गया। वैज्ञानिक साक्ष्यों और लगातार पूछताछ के बाद जांच ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे मामले का सच उजागर कर दिया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में धर्मदेव महतो ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, परिवार में लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि बड़ा भाई कमलदेव महतो अपनी हिस्से की जमीन मां के नाम से अपने पक्ष में लिखवाने का दबाव बना रहा था। इसी विवाद और जमीन के लालच में धर्मदेव ने कथित तौर पर एक खौफनाक साजिश रची। उसने अपनी मां पार्वती देवी की गड़ासे से हत्या कर दी और पूरे मामले का दोष बड़े भाई पर डालने की कोशिश की, ताकि पुलिस की जांच दूसरी दिशा में चली जाए। वारदात के बाद उसने हत्या में प्रयुक्त गड़ासे को घर के सामने स्थित एक गड्ढे में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है तथा हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है। यह उस बदलते समाज का आईना है, जहां कई बार रिश्तों की गर्माहट पर संपत्ति की ठंडी दीवारें भारी पड़ने लगी हैं। कानून अपना काम करेगा और दोषी को सजा भी मिलेगी, लेकिन एक मां की ममता का जो रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। जमीन के कुछ टुकड़ों की कीमत यदि मां की जान बन जाए तो यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक पतन का सबसे दर्दनाक प्रमाण है।