देशभर से पहुंचे रचनाकारों ने राष्ट्र, समाज, नारी शक्ति और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया
बिहार : जब शब्द संवेदनाओं का रूप लेते हैं और कविताएं मन की गहराइयों को स्पर्श करती हैं, तब साहित्य केवल पढ़ने की चीज नहीं रह जाता, बल्कि वह समाज को जोड़ने वाली शक्ति बन जाता है। पटना संग्रहालय का सभागार भी कुछ ऐसे ही भावपूर्ण और साहित्यिक माहौल का साक्षी बना, जहां कविता ने विचारों को स्वर दिया, स्मृतियों ने सम्मान का रूप लिया और साहित्य ने एक बार फिर समाज को नई दिशा देने का संदेश दिया।
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा 'सामयिक परिवेश' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11वें आदिशक्ति प्रेमनाथ खन्ना तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत भव्य कवि सम्मेलन, पत्रिका विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। पूरे आयोजन के दौरान साहित्य, संस्कृति और सृजन की गरिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

इस अवसर पर ममता मेहरोत्रा ने कहा कि अपने पिता की स्मृति में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम हर वर्ष उन्हें आत्मिक संतोष और नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कविता मनुष्य के भीतर छिपे भावों को अभिव्यक्ति देने के साथ-साथ समाज की संवेदनाओं को भी सशक्त स्वर देती है। उनके अनुसार साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का दर्पण भी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में साहित्य की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है। ऐसे दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब साहित्य लोगों को जोड़ने और सकारात्मक सोच विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने प्रेमनाथ खन्ना की स्मृति में प्रतिवर्ष इस आयोजन को निरंतर जारी रखने के लिए 'सामयिक परिवेश' की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय पहल बताया।
कार्यक्रम का संयोजन और संचालन लेखिका सविता राज ने प्रभावशाली ढंग से किया। उनके सहज और सधे हुए संचालन ने पूरे आयोजन को गरिमामय बनाए रखा तथा श्रोताओं को आरंभ से अंत तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।
कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, नारी सम्मान और बदलते समय की चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। गंभीर भावों से लेकर व्यंग्य और ओज तक की विविध रंगों से सजी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा और सभागार बार-बार तालियों की गूंज से भर उठता रहा।
समारोह के दौरान 'सामयिक परिवेश' पत्रिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक साहित्यकारों और रचनाकारों को सम्मानित कर उनके सृजनात्मक योगदान का अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी, ममता मेहरोत्रा, संजय कुमार कुंदन, रमेश कंवल, सुनील कुमार उपाध्याय, सविता राज, आचार्य विजय गुंजन, रवि किशन, मो. नसीम अख्तर, कुमार विरल, राजप्रिया रानी, मधुरेश नारायण, सुजीत कुमार, कमलनयन श्रीवास्तव, अभिजीत चौरसिया, श्वेता ग़ज़ल, राम रक्षा मिश्र विमल, अंशु कुमार, विजय पाठक, विभा रानी श्रीवास्तव, अविनाश बंधु, मुकुंद कुमार, सागरिका रॉय, नंद किशोर साहू, सुमन कुमार मिश्र, विद्यापति चौधरी, अनीता सिद्धि मिश्रा, पूनम आनंद सहित अनेक प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में ममता मेहरोत्रा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।