नवाब विर्क के नाम से तुर्की की नागरिकता लेकर अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथमफेटामाइन की तस्करी का आरोप
नई दिल्ली : नाम बदला, पहचान बदली और तुर्की की नागरिकता भी हासिल कर ली, लेकिन भारतीय एजेंसियों की नजर से कथित ड्रग सरगना नवप्रीत सिंह नहीं बच सका। ‘नवाब विर्क’ की फर्जी पहचान के सहारे विदेश में रह रहे नवप्रीत को तुर्की से प्रत्यर्पित कर शनिवार को भारत लाया गया। उस पर अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथमफेटामाइन की तस्करी में शामिल रहने का आरोप है। भारत पहुंचने के बाद उसे ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में जेल भेज दिया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए इसमें शामिल एजेंसियों को बधाई दी। गृह मंत्रालय के अनुसार, नवप्रीत ने नवाब विर्क के नाम से तुर्की की नागरिकता हासिल की थी। इसके बावजूद वह कथित तौर पर अफगानिस्तान से भारत तक मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा रहा। भारतीय एजेंसियों ने उसकी असली पहचान का पता लगाया और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। शाह ने कहा कि सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर नार्को-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, भगोड़ों को विदेश से वापस लाने के समन्वित अभियान के तहत 2019 से अगस्त 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़ों को भारत लाया गया है। सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है और इसके लिए वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय तथा कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है। गृह मंत्री ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा है।
सरकार के अनुसार, 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम के बाद 2020 से भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया मिशन मोड में आगे बढ़ाई गई। इसके बाद कार्रवाई का दायरा संगठनों तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत आतंकियों, हैंडलरों, फंडिंग नेटवर्क और विदेश में मौजूद सहयोगी तंत्र तक बढ़ाया गया।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करने के लिए जनवरी 2025 में ‘भारतपोल’ शुरू किया गया। इसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालयों को जोड़ा गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़े हैं। इससे एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में लगने वाला समय कम हुआ है और कई मामलों में जानकारी तीन से 10 दिनों में उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार ने दावा किया है कि पीएमएलए के तहत 2019 से 2026 के दौरान भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि 18,762 करोड़ रुपये की संपत्ति या धन की वापसी कराई गई। विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए हैं। इसमें जुलाई 2026 तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का आंकड़ा भी दिया गया है, हालांकि दोनों आंकड़ों के अलग-अलग संदर्भ का विवरण विज्ञप्ति में स्पष्ट नहीं किया गया है।
