बताया कैसे नमाज पढ़ने की बात कहने के कुछ मिनट बाद को-पायलट ने पीछे से शुरू कर दिया था हमला। खून से लथपथ होने के बावजूद नहीं मानी थी हार
वह खौफनाक उड़ान गुजर चुकी है, लेकिन भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के लिए 34 हजार फीट की ऊंचाई पर बिताए वे कुछ मिनट शायद जिंदगी भर भुलाना आसान नहीं होगा। सिर पर लगातार वार, आंखों के आगे छाता अंधेरा, तेजी से नीचे जाता विमान और बाहर यात्रियों की चीखें—अब कैप्टन स्मित ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उस दिन की पूरी आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया कि कैसे दुबई से तेल अवीव के लिए बिल्कुल सामान्य तरीके से शुरू हुई उड़ान अचानक जिंदगी और मौत के संघर्ष में बदल गई थी।
कैप्टन स्मित ने उस दिन को याद करते हुए बताया कि उड़ान सामान्य चल रही थी। इसी दौरान को-पायलट ने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई थी। खाड़ी क्षेत्र में इसे सामान्य बात मानते हुए उन्होंने शिष्टाचार के नाते सामने की ओर देखना शुरू कर दिया, ताकि सह-पायलट को इबादत के लिए एकांत मिल सके। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनट बाद कॉकपिट के भीतर हालात पूरी तरह बदलने वाले हैं। करीब चार से पांच मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे किसी भारी चीज से जोरदार वार हुआ।
पहले वार के बाद वह तत्काल समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है। उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आई है या किसी नुकसान के कारण कॉकपिट में जोरदार झटका लगा है। लेकिन संभलने का मौका मिलने से पहले ही सिर पर लगातार कई और वार किए गए। तभी उन्हें अहसास हुआ कि विमान में कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई है, बल्कि उनके साथ कॉकपिट में मौजूद दूसरा पायलट ही उन पर हमला कर रहा है। बाद में सामने आई जानकारी के मुताबिक, हमले में कॉकपिट में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया था।
लगातार हुए हमलों से कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा और आसपास की चीजें धुंधली दिखाई देने लगीं। इसी हालत में उन्हें महसूस हुआ कि विमान बहुत तेजी से सीधे नीचे की ओर जा रहा है। अब खतरा केवल उनकी जिंदगी तक सीमित नहीं था। विमान में सवार यात्रियों और क्रू की जान भी दांव पर थी। उन्होंने एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन हमलावर ने उसे तत्काल फिर बंद कर दिया।
इसके बाद के कुछ पल सबसे कठिन थे। खून से लथपथ कैप्टन स्मित कॉकपिट के फर्श पर पड़े थे। उन्हें तेज हवाओं जैसी आवाज और बाहर से यात्रियों की चीखें सुनाई दे रही थीं। शरीर जवाब दे रहा था, लेकिन उन्हें अहसास था कि यदि उस समय वह हिम्मत नहीं जुटा पाए तो उनकी ही नहीं, विमान में मौजूद सभी लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने खुद को संभाला और बची हुई पूरी ताकत लगाकर उठने की कोशिश की।
गंभीर चोटों के बावजूद वह किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोल दिया। बाहर केबिन क्रू और यात्री पहले से मुस्तैद थे। मौका मिलते ही वे कॉकपिट में पहुंचे और हमलावर को काबू में कर लिया। इस संघर्ष के बाद विमान पर नियंत्रण हासिल किया जा सका।
फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 उस समय करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी।
घटना के दौरान विमान से इमरजेंसी सिग्नल भेजे गए थे और उसने 17 हजार फीट से अधिक की तेज गिरावट दर्ज की थी। विमान में 27 बच्चों सहित कुल 174 यात्री और क्रू सवार थे। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कैप्टन स्मित खून से लथपथ और ऑक्सीजन मास्क लगाए विमान की गैलरी में लेटे दिखाई दिए थे। स्थिति नियंत्रित होने के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया था।
घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की काफी चर्चा हुई थी। मुंबई के घाटकोपर के रहने वाले स्मित को कमर्शियल विमानन क्षेत्र में 13 वर्ष से अधिक का अनुभव बताया गया है। फ्लाईदुबई से पहले वह भारत में स्पाइसजेट के साथ एक दशक से ज्यादा समय तक जुड़े रहे थे, जहां उन्होंने लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की जिम्मेदारी भी संभाली थी। उनके पास करीब 9,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव बताया गया है। उनके भाई भी फ्लाईदुबई में पायलट हैं। घटना के बाद दोस्तों, पड़ोसियों और पूर्व सहयोगियों ने संकट के समय दिखाई गई उनकी हिम्मत की सराहना की थी।
मीडिया रिपोर्टों में हमलावर सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में बताई गई थी। आरोप है कि उसने कॉकपिट में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी से कैप्टन स्मित पर हमला किया था। यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शमसी ने घटना को आतंकी साजिश करार दिया था। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अल-हम्मामी को उसके कथित कट्टरपंथी विचारों के कारण पहले ओमान में विमान उड़ाने से रोका गया था और पायलट प्रशिक्षण से भी हटा दिया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, अल-हम्मामी ने ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से विमानन प्रबंधन में डिस्टेंस लर्निंग की थी और घटना से करीब आठ महीने पहले ही फ्लाईदुबई से जुड़ा था। घटना के बाद उसके अतीत और भर्ती प्रक्रिया को लेकर जांच शुरू हुई थी कि ऐसी पृष्ठभूमि के बावजूद उसे नौकरी कैसे मिली।
अब कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू के सामने उन्हीं खौफनाक पलों को याद करते हुए बताया है कि कुछ मिनटों में सामान्य उड़ान किस तरह जानलेवा संघर्ष में बदल गई थी। उनकी आपबीती एक बार फिर उस घटना को सामने ले आई है, जिसमें गंभीर रूप से घायल पायलट की हिम्मत और केबिन क्रू व यात्रियों की तत्परता ने विमान में सवार लोगों को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
दो गुमनाम पायलटों ने संभाली थी विमान की कमान
हमले के बाद विमान की कमान उसमें यात्री के तौर पर सफर कर रहे दो अतिरिक्त फ्लाईदुबई पायलटों ने संभाली थी। दोनों चालक दल के सदस्य थे और ‘डेडहेडिंग’ के तहत यात्रा कर रहे थे। उन्हें तेल अवीव से विमान वापस दुबई ले जाना था। कप्तान स्मित मच्छार के गंभीर रूप से घायल होने और कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद एक अतिरिक्त पायलट तेजी से अंदर पहुंचा और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। कुछ ही देर में दूसरा पायलट भी कॉकपिट पहुंच गया। यात्री डेनियल श्लिख्टर के मुताबिक, दोनों ने विमान को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, घटना के तीन दिन बाद तक इन दोनों पायलटों की सार्वजनिक पहचान सामने नहीं आई।
