उत्तर प्रदेश सरकार ने 4 जून को जारी ई-पंजीकरण मॉड्यूल संबंधी शासनादेश निरस्त करने का फैसला किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स के विरोध के बाद ऑनलाइन रजिस्ट्री से जुड़े ई-पंजीकरण मॉड्यूल संबंधी शासनादेश को वापस लेने का निर्णय किया है। स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने सोमवार को बताया कि 4 जून को जारी शासनादेश को निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना था, लेकिन इसे लेकर उत्पन्न भ्रम को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

रवींद्र जायसवाल ने बताया कि ई-पंजीकरण मॉड्यूल को लागू करने का उद्देश्य विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा बेची जाने वाली संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना था। मौजूदा व्यवस्था में खरीदार, उसके डीड राइटर अथवा अधिवक्ता को संबंधित प्राधिकरण से निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज प्राप्त कर उप निबंधक कार्यालय में प्रस्तुत करना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त खपत होती थी।

सरकार ने प्रस्तावित व्यवस्था में यह प्रावधान किया था कि ऐसी संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण के लिए प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी, खरीदार, डीड राइटर अथवा अधिवक्ता की उप निबंधक कार्यालय में व्यक्तिगत उपस्थिति की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाए। इसके स्थान पर प्राधिकरण का अधिकृत अधिकारी अपने कार्यालय से ही डीड राइटर या अधिवक्ता द्वारा तैयार दस्तावेजों को ऑनलाइन माध्यम से संबंधित उप निबंधक कार्यालय भेजता। इसके बाद उप निबंधक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज ऑनलाइन वापस भेज देता, जिन्हें खरीदार, डीड राइटर या अधिवक्ता प्राधिकरण कार्यालय से ही प्राप्त कर सकते थे।

मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से समय की बचत, प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्य में तेजी लाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, शासनादेश में पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने के कारण कई स्थानों पर अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स के बीच यह भ्रम फैल गया कि नई व्यवस्था से उनका रोजगार प्रभावित होगा। इसी कारण प्रदेशभर में इसका विरोध शुरू हो गया।

रवींद्र जायसवाल ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए 4 जून को जारी शासनादेश निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाएगा, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जा सके।