राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर संसद के मानसून सत्र को दी मंजूरी, 13 अगस्त तक दोनों सदनों में चलेगी कार्यवाही
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस वर्ष 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा और राज्यसभा की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। आगामी सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों, राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों और नीतिगत मामलों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से मानसून सत्र की तारीखों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद दोनों सदनों की बैठक 20 जुलाई से शुरू होगी और 13 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान सरकार विभिन्न विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा कराने की तैयारी में है। विपक्ष भी कई समसामयिक विषयों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है, जिससे सत्र के दौरान तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की हालिया चुनावी सफलता के बाद यह पहला मानसून सत्र होगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत के बाद अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों से जुड़े मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार है।
उधर, राज्यसभा में नए और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत हुई है। ऐसे में सरकार को उच्च सदन में अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में पहले से अधिक मजबूती मिलने की संभावना है।
पिछला संसदीय सत्र सरकार के लिए अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के माध्यम से वर्ष 2029 से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़े प्रावधानों को लागू करने का प्रस्ताव था। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में सरकार की रणनीति और विपक्ष की भूमिका दोनों पर देश की नजरें रहेंगी।
