गुरुग्राम में आयोजित 11वीं ब्रिक्स की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, समानता और तकनीकी नवाचार पर बनी व्यापक सहमति


नई दिल्ली : भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत गुरुग्राम में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक वैश्विक ऊर्जा सहयोग के लिहाज से कई महत्वपूर्ण फैसलों की गवाह बनी। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और सभी के लिए किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों ने साझा रणनीति तैयार की। बैठक का समापन संयुक्त विज्ञप्ति को अपनाने के साथ हुआ, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। भारत ने इस अवसर पर स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत कर ऊर्जा क्षेत्र में अपने बढ़ते वैश्विक नेतृत्व का भी परिचय दिया।

"स्थिति से दृढ़ता से उबरने, नवाचार, सहयोग और संवहनीयता के लिए निर्माण" विषय पर आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्री, उप मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

'सर्वेषां ऊर्जाम्' यानी 'सभी के लिए ऊर्जा' की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए चर्चा तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित रही। पहला विषय ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता रहा, जिसमें विविध ऊर्जा स्रोतों, महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और सुरक्षित एवं किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। दूसरा विषय ऊर्जा पहुंच और समानता रहा, जिसके तहत सभी लोगों तक सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने, स्वच्छ खाना पकाने के समाधान, क्षमता निर्माण और विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहयोग पर चर्चा हुई। तीसरे विषय में स्मार्ट ग्रिड, हाइड्रोजन वैल्यू चेन, जैव ईंधन, ऊर्जा प्रणालियों के डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा दक्षता, कार्बन कैप्चर तकनीक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

बैठक में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रत्येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास प्राथमिकताओं और ऊर्जा परिवर्तन की अपनी अलग-अलग जरूरतों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की संयुक्त विज्ञप्ति को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार, सतत विकास, ऊर्जा अवसंरचना और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

केंद्रीय विद्युत तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि ऊर्जा आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और मानव कल्याण की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपने नागरिकों की आकांक्षाएं पूरी करने के साथ-साथ सतत विकास के लिए पर्याप्त संसाधन और नीतिगत सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने 'सर्वेषां ऊर्जाम्' के सिद्धांत के अनुरूप भविष्य के लिए सुरक्षित, लचीली और जन-केंद्रित ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उत्पादक और उपभोक्ता देश बन चुका है। देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता लगभग 540 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों का है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जहां भारत की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग तीन गीगावाट थी, वहीं आज यह बढ़कर 154 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाएं आम नागरिकों को ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मंत्री ने वर्ष 2032 तक 400 गीगावाट घंटे से अधिक ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने निर्धारित समय से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग मंच के तहत स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ रहा। यह मंच सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, नीति निर्माण, क्षमता विकास, अनुसंधान और सर्वोत्तम अनुभवों के आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा। इसके साथ ही स्मार्ट ग्रिड एवं ऊर्जा भंडारण पर ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी अपनाया गया, जिससे आधुनिक और डिजिटल ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिलेगी।

बैठक में हाइड्रोजन वैल्यू चेन-2026 पर संयुक्त रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग मंच के संशोधित संदर्भ दस्तावेज को भी मंजूरी दी गई, जिससे सदस्य देशों के बीच तकनीकी और अनुसंधान सहयोग को संस्थागत मजबूती मिलेगी।

संयुक्त विज्ञप्ति में ब्रिक्स देशों ने दोहराया कि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा समानता और तकनीकी नवाचार भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं। सदस्य देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, जैव ईंधन, हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन कैप्चर तकनीक, डिजिटलीकरण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही ब्रिक्स युवा ऊर्जा शिखर सम्मेलन के आयोजन का समर्थन करते हुए युवाओं की भागीदारी और अनुसंधान सहयोग को भी भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।

बैठक के समापन पर सभी सदस्य देशों ने भारत की सफल अध्यक्षता और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के प्रयासों की सराहना की तथा वर्ष 2027 में चीन की अध्यक्षता में इस सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।