1200 किलोवाट क्षमता वाले इंजन से मिलेगी शक्ति, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और स्वदेशी रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार

नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने स्वच्छ, हरित और भविष्य की परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली दैनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन सेवा को मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन हरियाणा के जिंद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित रूप से संचालित की जाएगी। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करने में मददगार होगी, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक बनेगी।

रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन का संचालन 74010/74009 नंबर के साथ किया जाएगा। इससे पहले मई में उत्तरी रेलवे के जिंद-सोनीपत सेक्शन पर 10 कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेनसेट चलाने को मंजूरी दी गई थी। अब सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्रेनसेट नियमित सेवा शुरू करने के लिए लगभग तैयार है। अंतिम औपचारिकताएं पूरी होते ही इसे यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

यह ट्रेन जिंद सिटी, पांडु पिंडारा, लालित खेड़ा, भाम्बेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराईं, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहाना, हरियाणा और बरवासनी स्टेशनों पर व्यावसायिक ठहराव करेगी। इस रेलखंड को हाइड्रोजन ट्रेन संचालन के लिए पायलट रूट के रूप में चुना गया है।

नियमित परिचालन से पहले जून में दिल्ली और जिंद के बीच इस ट्रेन का सफल ट्रायल रन किया गया था। परीक्षण के दौरान ट्रेन की आपातकालीन ब्रेकिंग क्षमता, दोलन (ऑसिलेशन) और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों की जांच की गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण के परिणाम संतोषजनक रहे और ट्रेन सभी आवश्यक मानकों पर खरी उतरी।

रेल मंत्रालय ने बताया कि यह ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होगी और इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रासायनिक अभिक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में प्रदूषणकारी उत्सर्जन बेहद कम होता है, इसलिए इसे पर्यावरण के अनुकूल तकनीक माना जाता है।

परियोजना के तहत जिंद में स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा भी विकसित की गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) ने यहां संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस जारी कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, रिफ्यूलिंग प्रक्रिया को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए अत्याधुनिक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ तकनीकी सहायता, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था भी की गई है, ताकि संचालन के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए।

सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण केंद्र पर हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर तथा फ्लेम डिटेक्टर जैसे आधुनिक सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। इन उपकरणों की नियमित जांच और सफाई की जाएगी, जिससे सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन सुनिश्चित हो सके। रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेनसेट और हाइड्रोजन संयंत्र के संचालन एवं रखरखाव के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) से अनुमोदित ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस मैनुअल भी तैयार किए हैं। इसके अलावा सुरक्षा प्रावधानों, नियमित ऑडिट तथा शकूरबस्ती स्थित मेंटेनेंस सुविधा के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी लागू कर दी गई हैं।

रेल मंत्रालय का कहना है कि इस परियोजना के शुरू होने के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देश पहले से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह पहल भविष्य में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।