- कहा, जैन धर्म की शिक्षाएं तनाव, संघर्ष और नैतिक पतन से जूझ रही दुनिया को शांति, संयम और करुणा का मार्ग दिखा रही हैं
रायपुर : भौतिक उपलब्धियों की अंधी दौड़ और बढ़ते तनाव के दौर में यदि कोई दर्शन आज भी मनुष्य को भीतर से मजबूत बनने का मार्ग दिखाता है, तो वह जैन दर्शन है। यही संदेश लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रायपुर में आयोजित परम पूज्य आचार्य विनय कुशल जी महाराज के भव्य आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव में दिया। उन्होंने कहा कि जैन संत और मुनि अपने जीवन, तपस्या और विचारों के माध्यम से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की धारा प्रवाहित कर रहे हैं।
अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा कि वर्तमान समय में समाज तनाव, चिंता, संघर्ष और नैतिक मूल्यों के क्षरण जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में जैन धर्म की शिक्षाएं शांति, आत्म-संयम और नैतिक जीवन जीने का शाश्वत मार्ग प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन केवल एक धार्मिक विचार नहीं, बल्कि मानवता को संतुलित, शांत और अनुशासित जीवन की दिशा देने वाला जीवन दर्शन है।
जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक सुख और संतुष्टि केवल भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती। आत्म-संयम, मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और नैतिक मूल्यों के पालन से ही स्थायी आनंद और परमानंद की प्राप्ति संभव है। उन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा, करुणा और संयम का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। यदि सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा का भाव अपनाया जाए तो विश्व में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने जैन संतों और मुनियों के जीवन को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उन्होंने सत्य, सहानुभूति और आध्यात्मिक जागरूकता पर आधारित नैतिक समाज के निर्माण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। उनका तप, त्याग और अनुशासन लोगों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने जैन संतों के आत्म-संयम को नमन करते हुए कहा कि अनेक संत और मुनि अपने अंतर्मन को दृढ़ बनाने तथा समाज को दिशा देने के लिए दीर्घकालीन उपवास और कठोर साधना का मार्ग अपनाते हैं। उन्होंने एक युवा बाल मुनि की उल्लेखनीय आध्यात्मिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि कम आयु में भी एकाग्रता, ज्ञान और तपस्या के बल पर जीवन में असाधारण परिवर्तन लाया जा सकता है।
ओम बिरला ने कहा कि जैन आचार्यों और संतों का जीवन अनुशासन, त्याग और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण है। उनका आचरण लोगों को धैर्य, आत्म-संयम और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों और मुनियों का मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा और समाज में आध्यात्मिक विकास तथा नैतिक उत्कृष्टता की भावना को मजबूत करेगा।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अपने संबोधन के अंत में लोकसभा अध्यक्ष ने लोगों से सत्य, नैतिकता, आत्म-अनुशासन और करुणा के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों की नींव पर एक मजबूत, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने दोहराया कि जैन संतों की शिक्षाएं और भगवान महावीर का दर्शन आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का प्रभावशाली स्रोत बना हुआ है।

