- मिसाइल, ड्रोन और जवाबी हमलों के दावों ने पूरे पश्चिम एशिया को नई अनिश्चितता में धकेला। सऊदी अरब और कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की मांग की
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धुंधली पड़ती नजर आ रही हैं। ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र को नई चिंता में डाल दिया है।
अमेरिकी सैन्य कमान सेंटकॉम ने दावा किया है कि ईरान की ओर से की गई आक्रामक गतिविधियों के जवाब में अमेरिकी बलों ने आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसके सैन्य ठिकानों और संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा है कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल उसके खिलाफ अभियानों में किया जा रहा था। ईरानी पक्ष का दावा है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए की गई है। इसके बाद पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
इस बीच कुवैत ने अपने वायु रक्षा तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि संभावित बड़े नुकसान को टाल दिया गया। कुवैती अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बलों ने समय रहते खतरे का मुकाबला किया और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही कुवैत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
सऊदी अरब ने भी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई, जो क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का कारण बने, उससे बचना चाहिए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता बताई गई है।
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा हालात को लेकर अत्यधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और अंततः कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि संवाद और समझौते की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हालिया घटनाएं केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे रणनीतिक और भू-राजनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। ऊर्जा आपूर्ति मार्गों, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा इस तनाव को और जटिल बना रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ती यह अनिश्चितता वैश्विक समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सभी पक्ष संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रह सके।

