ईपीएफओ जुलाई के पहले सप्ताह से नई डिजिटल सुविधा शुरू करने की तैयारी में है 


नई दिल्ली : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए कई बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में है। इनमें सबसे बड़ा बदलाव पीएफ खाते से यूपीआई के माध्यम से सीधे धनराशि निकालने की सुविधा है। अधिकारियों के अनुसार यह सेवा दो जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। यदि किसी तकनीकी कारण से देरी होती है तो इसे पांच जुलाई तक लागू किया जा सकता है।

इस सुविधा को शुरू करने के लिए ईपीएफओ अपने नए सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपडेट कर रहा है। पिछले चार दिनों से इसी प्रक्रिया के कारण संगठन की वेबसाइट प्रभावित रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एक जुलाई तक पूरा सिस्टम नए प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित हो जाएगा, जिसके बाद नई सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्यों को पीएफ से राशि निकालने के लिए पहले की तरह आवेदन करने या मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सदस्य अपनी पात्र धनराशि स्वयं चुन सकेंगे और वह रकम यूपीआई के जरिए सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाएगी। इससे आपातकालीन जरूरत के समय पीएफ की राशि तुरंत प्राप्त करना संभव होगा।

मौजूदा व्यवस्था में पीएफ निकासी के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियों के तहत क्लेम दाखिल करना पड़ता है। एडवांस क्लेम के माध्यम से अधिकतम तीन लाख रुपये तक की निकासी की अनुमति है, लेकिन इसके लिए आवेदन, सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने पर क्लेम खारिज भी हो जाता है। यूपीआई आधारित नई प्रणाली लागू होने के बाद आवेदन और लंबी प्रतीक्षा की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

हालांकि नई सुविधा के साथ सेवानिवृत्ति सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण शर्त भी लागू रहेगी। सदस्य अपने कुल पीएफ बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा खाते में सुरक्षित रखेंगे। केवल वैध और पात्र राशि ही यूपीआई के माध्यम से निकाली जा सकेगी।

ईपीएफओ में सुधार केवल निकासी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सरकार लंबे समय से उठ रही न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। संभावना है कि इस वर्ष के अंत तक या अगले वित्तीय वर्ष में इस संबंध में कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार सरकार कर्मचारी पेंशन योजना के तहत बेसिक वेतन की मौजूदा 15 हजार रुपये मासिक सीमा को बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही न्यूनतम मासिक पेंशन को एक हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये तक किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय पेंशन नियमों में भी बदलाव के कई विकल्पों पर मंथन कर रहा है। पहला प्रस्ताव यह है कि यदि कोई कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बाद तत्काल पेंशन शुरू नहीं करना चाहता तो उसे 65 या 70 वर्ष की आयु तक पेंशन शुरू करने का विकल्प दिया जाए। इस दौरान उसके जमा फंड पर ब्याज भी मिलता रहे, ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

दूसरे प्रस्ताव के तहत कर्मचारी और नियोक्ता के अंशदान से तैयार फंड का उपयोग सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से अधिक पेंशन उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर भी विस्तृत चर्चा चल रही है, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भविष्य में बेहतर मासिक पेंशन मिल सके।

विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार यदि किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्ति तक पीएफ खाते में लगभग 25 लाख रुपये का कोष जमा हो जाता है तो उसे करीब 17 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल सकती है। वहीं यदि कोई कर्मचारी 15 हजार रुपये के मूल वेतन से नौकरी शुरू करता है और उसके वेतन में हर वर्ष औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो 35 वर्ष की सेवा पूरी होने तक उसके खाते में बड़ा फंड तैयार हो सकता है, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर पेंशन मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।