पृथ्वी के 23.5 डिग्री झुकाव का दिखेगा अनोखा असर, दिन करीब 13 घंटे 58 मिनट और रात केवल 10 से 11 घंटे की रह सकती है

नई दिल्ली। रविवार, 21 जून 2026 का दिन खगोल विज्ञान की दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोगों को वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात देखने को मिलेगी। भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश देशों में सूरज सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक आकाश में दिखाई देगा। इस खगोलीय घटना को ग्रीष्म अयनांत या समर सॉल्सटिस कहा जाता है, जो हर वर्ष जून महीने में घटित होती है।

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी लगातार सूर्य की परिक्रमा करती रहती है, लेकिन उसकी धुरी लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। पृथ्वी के इसी झुकाव और उसकी परिक्रमा के संयुक्त प्रभाव के कारण मौसम बदलते हैं तथा दिन और रात की अवधि में अंतर दिखाई देता है। 21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिकतम झुकाव की स्थिति में पहुंच जाता है। यही कारण है कि इस दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा के आसपास लगभग सीधी पड़ती हैं और दिन की अवधि वर्ष में सबसे अधिक हो जाती है।

भारत के अधिकांश हिस्सों में 21 जून को दिन की अवधि लगभग 13 घंटे 58 मिनट तक रह सकती है। हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण इसमें कुछ मिनटों का अंतर संभव है। दिन लंबा होने के साथ ही रात की अवधि घटकर लगभग 10 से 11 घंटे के बीच रह जाती है। यही वजह है कि 21 जून को साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात माना जाता है।

कर्क रेखा के आसपास सूर्य इस दिन आकाश में अपनी सबसे ऊंची स्थिति के करीब दिखाई देता है। सूर्य पूर्व दिशा से उदय होकर पश्चिम दिशा में अस्त होने तक सामान्य दिनों की तुलना में आकाश में अपेक्षाकृत लंबा रास्ता तय करता है। इसी कारण सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक धरती पर बना रहता है और दिन की अवधि बढ़ जाती है।

नासा के खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार 21 जून को उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका होता है। यही वजह है कि भारत, अमेरिका, कनाडा, यूरोप और एशिया के अधिकांश देशों में यह दिन साल का सबसे लंबा दिन बन जाता है। इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्ध के देशों में इसी दिन साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है, क्योंकि उस समय पृथ्वी का दक्षिणी भाग सूर्य से अपेक्षाकृत दूर झुका रहता है।

21 जून केवल लंबे दिन के कारण ही खास नहीं है, बल्कि इस दिन दोपहर के समय एक रोचक खगोलीय घटना भी देखने को मिल सकती है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘जीरो शैडो डे’ कहा जाता है। कर्क रेखा के आसपास स्थित कुछ क्षेत्रों में सूर्य लगभग सिर के ठीक ऊपर पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में किसी वस्तु की परछाई अत्यंत छोटी हो जाती है और कुछ समय के लिए लगभग गायब होती हुई दिखाई देती है। यही कारण है कि यह घटना खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का विषय होती है।