सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा और रक्षा तक देश के भविष्य का रोडमैप रखा

नई दिल्ली : लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को केवल बीते वर्षों की उपलब्धियों का लेखा-जोखा ही नहीं रखा, बल्कि अगले दो दशकों में भारत कैसा होगा, इसकी बड़ी तस्वीर भी देश के सामने रखी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को केंद्र में रखते हुए प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, कृषि, खेल और महिला सशक्तीकरण तक कई क्षेत्रों के लिए लक्ष्य तय किए। उन्होंने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले पांच-सात वर्षों में इन्हीं सात शक्तियों के दम पर देश को नई गति और नई ऊंचाई दी जाएगी।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज हर दिल वंदे मातरम के नाद से गूंज रहा है, हर घर तिरंगा है और हर मन तिरंगा है। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे विशेष अवसर बताया। देश के विभिन्न हिस्सों में हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

2047 तक विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने बड़ा सपना देखा है और वह सपना वर्ष 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत बनाने का है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश जब विकसित होने का संकल्प लेता है तो दुनिया भी उसे देखने का अपना नजरिया बदलने के लिए मजबूर होती है।

उन्होंने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 25 करोड़ देशवासी गरीबी को परास्त कर गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, जबकि अब वह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन करीब चार गुना, खादी एवं ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब पांच गुना और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब सात गुना बढ़ा है। आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 35 गुना बढ़ने का दावा भी उन्होंने किया। इसी अवधि में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब चार गुना, पेटेंट ग्रांट की संख्या चार गुना और डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़ने की बात कही गई।

उन्होंने नल से जल, गैस कनेक्शन, गरीबों के लिए शौचालय और आवास उपलब्ध कराने की रफ्तार में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों अनुपालन समाप्त किए गए हैं और सैकड़ों पुराने कानून हटाए गए हैं, क्योंकि पिछली शताब्दी के कानूनों के सहारे 21वीं शताब्दी की प्रगति संभव नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत पर सबसे बड़ा जोर

प्रधानमंत्री के संबोधन में आत्मनिर्भरता प्रमुख विषय रही। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के साथ अपने हितों की सुरक्षा भी स्वयं करनी होगी। मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल को इसी दिशा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और आने वाले सात-आठ वर्षों में पांच से आठ और सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने की संभावना है। उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया और कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू किया गया है, बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की घोषणा हुई है और कई देशों के साथ समझौते किए जा रहे हैं।

2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य

AI, चिप और डाटा सेंटर के विस्तार के साथ बढ़ती बिजली की जरूरत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर क्षमता का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इसी दशक में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में अहम पड़ाव पार किया है, जिससे परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने समुद्र मंथन अभियान के लिए 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर काम को गति देने की बात भी कही।

ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले करीब 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी, जो अब लगभग 700 शहरों तक पहुंच चुकी है। सोलर एनर्जी क्षमता 12 वर्ष पहले करीब दो गीगावॉट थी, जो अब 160 गीगावॉट तक पहुंच गई है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी से जुड़ा काम पूरा होने का आंकड़ा पार करने की बात भी उन्होंने कही।

रेलवे के विद्युतीकरण का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 1925 में शुरू हुए विद्युतीकरण के बावजूद 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत काम हुआ था, जबकि पिछले एक दशक में शेष 70 प्रतिशत पूरा कर शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल किया गया। उन्होंने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का भी उल्लेख किया।

वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए बड़ा अवसर

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी युद्ध तथा तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक संकटों ने आत्मनिर्भरता का महत्व और स्पष्ट किया है। उन्होंने उर्वरकों पर सरकार की सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा मिलने वाला यूरिया और डीएपी किसानों को भारी सहायता के साथ कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया संसाधनों, पेट्रोलियम, उर्वरक, दवाओं और तकनीक तक को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। ऐसे दौर में भारत को अपनी ताकत पर खड़ा होना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद दुनिया के करीब 40 देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने विशेष रूप से MSME क्षेत्र से इन अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय टेक्सटाइल, मशीनरी, दवाओं, समुद्री उत्पादों और अन्य वस्तुओं को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना होगा, लेकिन इसके लिए विश्वस्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।

‘शक्ति की सप्त धारा’ से विकास को नई गति

प्रधानमंत्री के भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा ‘शक्ति की सप्त धारा’ रहा। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच-सात वर्षों में सात प्रमुख क्षेत्रों की ताकत से देश को नई ऊंचाई और नई गति दी जाएगी।

पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग को बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत को छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन अपने यहां विकसित करनी होगी। डिजाइन से मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाने का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने उद्योगों और MSME से गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं करने का आग्रह करते हुए ‘क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी’ को मंत्र बनाने की बात कही।

दूसरी शक्ति कृषि और फूड प्रोडक्शन को बताया गया। प्रधानमंत्री ने किसानों को खेत से एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंचाने, फूड प्रोसेसिंग बढ़ाने और केमिकल फ्री खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

तीसरी शक्ति टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है। प्रधानमंत्री ने AI, क्वांटम, स्पेस, रोबोटिक्स और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को केवल दुनिया का बाजार नहीं, बल्कि इनोवेशन हब बनना होगा। UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता के बाद भारत को नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में नेतृत्व करने और मेड इन इंडिया 6G को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखना होगा।

चौथी शक्ति गति शक्ति है। इसके तहत हाई स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, इनलैंड वाटरवेज, एयरपोर्ट, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और पोर्ट आधारित विकास पर जोर दिया गया।

पांचवीं शक्ति रक्षा है। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ भारत को नेक्स्ट जेनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी का ग्लोबल सप्लायर बनाने की बात कही। ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम, हाइपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा को इसके प्रमुख क्षेत्र बताया गया।

छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है। इसके तहत ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग के साथ मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और ओसियन टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया।

सातवीं शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर, हील इन इंडिया, हस्तशिल्प, संस्कृति, फिल्म, VFX, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को भारत की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने WAVES समिट, वन्यजीव पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों और तेजी से बढ़ रही कॉन्सर्ट इकोनॉमी में भारत की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

Fortune 500 में 50 भारतीय कंपनियों का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने देश के उद्योग जगत के सामने भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उन्होंने सवाल किया कि आने वाले एक दशक में Fortune 500 कंपनियों में भारत की 50 कंपनियां क्यों नहीं हो सकतीं। इसी तरह दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में भारतीय बैंक, शीर्ष फार्मा कंपनियों में भारतीय कंपनियां और दुनिया की प्रमुख कंसल्टिंग, अकाउंटिंग और टेक्नोलॉजी कंपनियों में भारतीय संस्थानों को स्थान दिलाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से सुधारों की गति तेज करने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 के लक्ष्य को बीते समय के नीति-नियमों से हासिल नहीं किया जा सकता, इसलिए भविष्य के सपनों के अनुरूप नीतियां और व्यवस्थाएं बनानी होंगी।

एक करोड़ युवाओं को मिलेगी AI की ट्रेनिंग

युवाओं को विकसित भारत का सबसे बड़ा भागीदार और लाभार्थी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ढाई लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हो चुके हैं। सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के इनोवेशन फंड की घोषणा की है।

लाल किले से प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि भारतीय युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में नेतृत्व करने की क्षमता विकसित कर सकें।

उन्होंने स्पेस सेक्टर को निजी क्षेत्र के लिए खोलने, नेशनल ड्रोन पॉलिसी, खेलो इंडिया और नई शिक्षा नीति का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन को बढ़ाने के लिए 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की गई हैं।

प्रधानमंत्री ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग के लिए देशव्यापी नेटवर्क बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों और उपलब्ध संसाधनों को जोड़कर युवाओं को मुफ्त कोचिंग दी जाएगी।

खेल प्रतिभाओं के लिए देशभर में टैलेंट हंट

खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी का मजबूत दावेदार बनकर आगे बढ़ रहा है और 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि जिन खेल विधाओं में भारत अभी मजबूत नहीं है, उनमें प्रतिभा तैयार करने की जरूरत है।

इसके लिए पांच से 15 वर्ष तक के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने के लिए गांव-गांव, शहर-शहर और स्कूल-स्कूल टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही गई। चयनित बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बनाने की योजना पर काम किया जाएगा।

नशे और नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री ने युवाओं में बढ़ते नशे को गंभीर संकट बताते हुए नशा मुक्त भारत को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। नक्सलवाद और माओवाद पर उन्होंने कहा कि दशकों तक इस हिंसा ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया और हजारों सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। अब नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है।

उन्होंने हिंसा और अराजकता को वैचारिक रूप से बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियों से भी सावधान रहने का आह्वान किया और युवाओं को विकसित भारत की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया।

सिविल डिफेंस का बनेगा वाइब्रेंट नेटवर्क

राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनौती सीमा के भीतर हो या बाहर, भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है। युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने मिशन सुदर्शन चक्र पर तेजी से काम होने की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत का रक्षा निर्यात करीब 50 गुना बढ़ा है और लगभग 100 देशों तक भारतीय रक्षा उत्पाद पहुंच रहे हैं। उन्होंने लाल किले से देश में सिविल डिफेंस का एक वाइब्रेंट नेटवर्क खड़ा करने और उसे आधुनिक व्यवस्थाओं से जोड़ने की घोषणा भी की।

अब छह करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य

महिला सशक्तीकरण पर प्रधानमंत्री ने कहा कि फाइटर जेट से लेकर सिविल एविएशन तक देश की बेटियां अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल होने के बाद अब इसे बढ़ाकर छह करोड़ करने की बात उन्होंने कही।

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देकर उन्हें देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में बड़ी भूमिका देने का समय आ गया है।

जनगणना में युवाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील

प्रधानमंत्री ने जनगणना का भी उल्लेख किया और कहा कि यह केवल लोगों की गिनती नहीं, बल्कि भविष्य की नीतियों और योजनाओं का आधार है। सटीक जानकारी से ही सरकार देश के विकास की सही रूपरेखा तैयार कर सकती है। उन्होंने युवाओं से अपने परिवारों को जनगणना फॉर्म समझाने और इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहित और कर्तव्य को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उन्होंने देशवासियों से गुलामी की मानसिकता को लगातार समाप्त करने और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि समय, अवसर और संकल्प भारत के पास है और अब सपनों को संकल्प, संकल्प को सामर्थ्य और सामर्थ्य को सफलता में बदलने का समय है।