राज्य सरकार ने दो दिन की जगह एक दिन की छुट्टी का फैसला किया, हाईकोर्ट ने पशु वध संबंधी गाइडलाइन पर रोक लगाने से किया इनकार

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल में बकरीद को लेकर प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच माहौल गर्म हो गया है। राज्य सरकार ने ईद-उल-जोहा के अवसर पर छुट्टियों की अवधि घटाते हुए अब केवल एक दिन के अवकाश का फैसला किया है। इससे पहले पूर्ववर्ती सरकार के समय इस पर्व पर दो दिनों की छुट्टी का प्रावधान लागू था।

इधर, कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी बकरीद से पहले राज्य सरकार द्वारा जारी पशु वध संबंधी दिशा-निर्देशों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी गाय, भैंस, बैल या बछड़े के वध से पहले आवश्यक फिटनेस प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि ईद-उल-जोहा के अवसर पर गाय की कुर्बानी को इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा नहीं माना गया है। अदालत ने कानून और प्रशासनिक व्यवस्था के पालन पर जोर दिया।

इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने सरकारी दिशा-निर्देशों का विरोध करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहीं भाजपा ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में अवैध बूचड़खानों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।

बकरीद से पहले राज्य में छुट्टियों, धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक नियमों को लेकर चल रही बहस अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है।