एक युवक की हालत गंभीर, ओडिशा के कालाहांडी जिले में निर्माणाधीन टैंक के भीतर हुआ भयावह हादसा
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
ओडिशा के कालाहांडी जिले से मंगलवार को एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। मदनपुर रामपुर क्षेत्र के गौड़ कार्लाखुंटा गांव में निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक अचानक मौत के कुएं में बदल गया। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी ने देखते ही देखते छह लोगों की जान ले ली, जबकि एक अन्य मजदूर अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है।
गांव में उस समय सामान्य कामकाज चल रहा था, जब निर्माणाधीन शौचालय के सेप्टिक टैंक के भीतर सेंटरिंग सामग्री निकालने का काम शुरू हुआ। मजदूर एक-एक कर टैंक के अंदर उतरते गए, लेकिन कुछ ही देर बाद भीतर से किसी की आवाज आनी बंद हो गई। आशंका है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस भरी हुई थी और ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले अंदर गए मजदूर अचानक बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति टैंक में उतरा, लेकिन वह भी कुछ ही पलों में अचेत हो गया। इसके बाद बचाव की कोशिश में अन्य लोग भी एक-एक कर भीतर जाते चले गए और सभी दम घुटने का शिकार हो गए। कुछ ही मिनटों में पूरा गांव चीख-पुकार और अफरा-तफरी से भर उठा।
हादसे में जान गंवाने वालों में गौड़ कार्लाखुंटा गांव के सेप्टिक टैंक ठेकेदार निमाई पाल, उनके बेटे आकाश पाल, मजदूर आदल माझी, मातोगांडा गांव के मनोरंजन हाती, तथा दुतागांव के छंदा जाला और बिपुल जाला शामिल हैं। वहीं हातीखोला गांव के पंकज जानी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासनिक टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सभी लोगों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल मदनपुर रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। लेकिन वहां डॉक्टरों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल परिसर में परिजनों की चीखें और विलाप सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां एक साथ छीन लीं। गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों से सुबह लोग काम पर निकले थे, शाम तक वहां मातमी सन्नाटा लौट आया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
मदनपुर रामपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों और गैस जांच के मजदूरों को टैंक के भीतर क्यों उतारा गया।