चाय की दुकान पर फंदे से लटका मिला शव, घटनास्थल से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट। पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रहकर चाय की दुकान चला रहा था
हरिद्वार। करीब दो दशक तक देश के बहुचर्चित निठारी कांड से जुड़ा रहा सुरेंद्र कोली कानूनी मामलों से बाहर आने के बाद हरिद्वार में चाय की दुकान चलाकर जीवन गुजार रहा था। अब उसी दुकान पर उसका शव फंदे से लटका मिला है। हरिद्वार पुलिस ने कोली की आत्महत्या की पुष्टि की है। पुलिस उसकी मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।
शहर के उत्तरी हिस्से में सप्त सरोवर रोड पर लाल माता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान पर कोली का शव लटका मिला। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम और जांच के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियां और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और सड़क किनारे चाय की दुकान चलाता था। वह मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासेन इलाके के मंगरुखला गांव का रहने वाला था। पुलिस ने उसके परिवार को घटना की सूचना दे दी है।
सिटी कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि कोली निठारी मामले में आरोपी था। उसकी मौत के पीछे क्या कारण रहे, इसका अभी पता नहीं चला है। सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण पुलिस घटनाक्रम से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी कांड से जुड़ी कानूनी कार्यवाही नवंबर 2025 में समाप्त हुई थी। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए हत्याओं से जुड़े आखिरी लंबित मामले में उसकी सजा रद्द कर दी थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि कोली को पहले ही 12 अन्य मामलों में बरी किया जा चुका है। अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था, बशर्ते किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत न हो।
निठारी हत्याकांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। नोएडा के निठारी में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से बच्चों के कंकाल मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। मामले को लेकर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली।
शुरुआत में कोली को हत्याओं से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में अदालतों ने उसे विभिन्न मामलों में बरी कर दिया। नवंबर 2025 में आखिरी लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निठारी कांड से जुड़ी उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी। अब हरिद्वार पुलिस उसकी मौत की परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है।
