अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला, ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो गुटों के बीच खड़ा हुआ विवाद उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था करते हुए अरूप रॉय और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। आयोग ने इससे पहले दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था।

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाएगा।

यह विवाद चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग के समक्ष पहुंचा और इसे विवाद मामला संख्या 01/2026 के रूप में दर्ज किया गया। आयोग ने 17 सितंबर के आदेश में दोनों गुटों को मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोकते हुए उनसे नए नाम तथा मुक्त चुनाव चिह्नों के तीन-तीन विकल्प मांगे थे।

इसी बीच आयोग ने पांच विधानसभा सीटों और असम की एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। पार्टी विवाद का सीधा असर पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीट तथा असम की नगांव लोकसभा सीट की नामांकन प्रक्रिया पर पड़ा। इन तीनों सीटों के रिटर्निंग अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच 18 सितंबर तक स्थगित कर दी थी।

रेजीनगर में अरूप रॉय की ओर से अधिकृत सफिउज्जमान शेख और ममता बनर्जी की ओर से अधिकृत रबीउल आलम चौधरी ने तृणमूल उम्मीदवार होने का दावा करते हुए नामांकन दाखिल किया था। नंदीग्राम में अरूप रॉय की ओर से एहतशमुल हक और ममता बनर्जी की ओर से संचिता प्रधान (दे) ने नामांकन किया। नगांव लोकसभा सीट पर अब्दुल सलाम ने ममता बनर्जी द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के साथ नामांकन दाखिल किया।

आयोग ने कहा कि उसके हस्तक्षेप के बिना एक ही राजनीतिक दल के नाम पर दाखिल दो उम्मीदवारों के नामांकन ऐसी स्थिति में आ जाते, जहां पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न पहले ही फ्रीज किया जा चुका था। ऐसी स्थिति में रिटर्निंग अधिकारी केवल इसी आधार पर दोनों उम्मीदवारों के नामांकन खारिज करने के लिए बाध्य हो सकते थे। आयोग के मुताबिक इससे मतदाताओं को निष्पक्ष चुनावी प्रतिस्पर्धा से वंचित होने और चुनाव परिणाम प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो सकती थी।

इसी को देखते हुए आयोग ने रेजीनगर में सफिउज्जमान शेख के नामांकन पर ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चिह्न के उम्मीदवार के रूप में विचार करने का निर्देश दिया। वहीं रबीउल आलम चौधरी के नामांकन पर ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न के उम्मीदवार के रूप में विचार किया जाएगा। दोनों मामलों में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 सहित अन्य वैधानिक शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।

आयोग ने मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने और विवाद का अंतिम फैसला होने तक किसी उम्मीदवार या गुट को अनुचित नुकसान से बचाने को इस व्यवस्था का आधार बताया है।