इंदौर में 'वीणा की वाणी' संपादक सम्मेलन संपन्न, साहित्य और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर हुआ गहन मंथन

मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल के सौजन्य से इंदौर स्थित रानी अहिल्याबाई होल्कर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विज्ञान प्रेक्षागृह में दो दिवसीय संपादक सम्मेलन 'वीणा की वाणी' का भव्य आयोजन डॉ. विकास दवे के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस समागम में देश के विभिन्न अंचलों जैसे इंदौर, भोपाल, उज्जैन, रतलाम, बालाघाट, बाराशिवनी, जोधपुर, जयपुर, दतिया, वर्धा, जमशेदपुर, दिल्ली, नोएडा, पानीपत और आगरा से बड़ी संख्या में साहित्यकार, संपादक और विद्वान एकत्रित हुए। आयोजन के दौरान निर्धारित विभिन्न सत्रों में साहित्य और पत्रकारिता के समसामयिक विषयों पर गहन और विषद विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन के प्रथम सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. शुभदा पांडेय, प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेम जनमेजय और अन्य विद्वानों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय 'छपास की भूख और संपादक का चीरहरण' रखा गया था, जिस पर उपस्थित वक्ताओं ने बेबाकी से अपने विचार रखे।

इसी सत्र में डॉ. शुभदा पांडेय ने 'लालित्य' पत्रिका की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे कला, संस्कृति और साहित्य की एक प्रतिष्ठित पत्रिका बताया। उन्होंने पत्रिका के विभिन्न अंकों की चर्चा करने के साथ-साथ इसकी प्रधान संपादिका प्रोफेसर इमेरिटस डॉ. चित्रलेखा सिंह का विधिवत् परिचय भी प्रस्तुत किया।

डॉ. पांडेय ने अपने संबोधन में विश्वास व्यक्त किया कि इस द्विदिवसीय सम्मेलन के निष्कर्षों से आज के संपादकों को एक नई दिशा मिलेगी और उनका मार्ग सुलभ व सशक्त होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि साहित्य समाज को संस्कारों से जोड़ने का महती कार्य करता है, इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु 'लालित्य' का अगला अंक 'कोहबर विशेषांक' के रूप में निकाला जा रहा है।

इसका मुख्य लक्ष्य समाज को भारतीय संस्कृति के दाम्पत्य की स्थाई सघनता और सांद्रता से परिचित कराना है, क्योंकि कोहबर के रंग और व्यंग्य ही जीवन को वास्तविक आकृति प्रदान करते हैं। इस पूरे समारोह का अत्यंत प्रभावी और सशक्त संचालन अमन जी द्वारा किया गया।