• आईटीआई परीक्षा के पर्यवेक्षण शुल्क में कमीशन खाने को लेकर मारपीट। लाठी और बेल्ट निकले, जमकर गालीगलौज


मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अंगीभूत नीतिश्वर कॉलेज में आईटीआई परीक्षा के पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर दो शिक्षकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। आरोप है कि विवाद के दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया, गालीगलौज हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। घटना के बाद कॉलेज का माहौल काफी तनावपूर्ण बताया जा रहा है।


जानकारी के अनुसार हाल ही में संपन्न आईटीआई परीक्षा के पर्यवेक्षण शुल्क का वितरण किया जा रहा था। इसी दौरान बॉटनी विभाग के शिक्षक डॉ. प्रवाल ने पूरा शुल्क देने की बात उठाई। आरोप है कि असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर डॉ. हुसैन दिल्शी ने पूरा भुगतान देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस के दौरान एग्जामिनेशन कंट्रोलर रविरंजन भी वहां पहुंच गए। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि बातचीत के दौरान आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे माहौल और अधिक बिगड़ गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।


बताया जाता है कि कॉलेज के कुछ कर्मचारियों और शिक्षकों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की। इस दौरान बड़ा बाबू अभय सिंह और डॉ. श्याम तिवारी सहित अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। बाद में अन्य शिक्षकों के पहुंचने पर मामला कुछ शांत हुआ।


घटना के बाद कॉलेज परिसर में तनाव और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि परीक्षा संबंधी कार्यों में बाहरी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और शुल्क वितरण को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। कुछ शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्देशों के बावजूद कई मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती जाती।


शिक्षकों के बीच यह भी चर्चा है कि इंटरनल परीक्षाओं के मूल्यांकन और अन्य शैक्षणिक कार्यों के भुगतान में भी देरी और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।


कॉलेज प्रशासन को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ पदों पर लंबे समय से एक ही व्यक्ति की जिम्मेदारी बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। हालांकि इस संबंध में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच गई है। कुलपति प्रो. दिनेश राय ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की वस्तुनिष्ठ जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


घटना के बाद कॉलेज के शिक्षक और कर्मचारी दो गुटों में बंटे दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।