अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ रही है भारतीय रेलवे की अत्याधुनिक और लोकप्रिय वंदे भारत एक्सप्रेस, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश समेत कई देशों ने वंदे भारत ट्रेन में रुचि दिखाई है
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
कभी आधुनिक रेल तकनीक के लिए विदेशी देशों पर निर्भर रहने वाला भारत अब दुनिया को अपनी रेल तकनीक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। भारतीय रेलवे की अत्याधुनिक और लोकप्रिय वंदे भारत एक्सप्रेस अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ रही है। रेलवे कई देशों को इस सेमी हाई स्पीड ट्रेन के निर्यात की योजना पर काम कर रहा है, जिससे भारत वैश्विक रेल उद्योग में एक नई भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है।
वंदे भारत एक्सप्रेस ने देश में अपनी गति, आधुनिक सुविधाओं और आरामदायक यात्रा अनुभव के कारण खास पहचान बनाई है। यही वजह है कि नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों ने इस ट्रेन में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। कई देशों के प्रतिनिधि भारत आकर वंदे भारत ट्रेन की तकनीक, संचालन प्रणाली और सुविधाओं का अध्ययन भी कर चुके हैं। जो देश महंगी बुलेट ट्रेन परियोजनाओं पर अरबों रुपये खर्च करने की बजाय कम लागत में आधुनिक रेल व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं, उनके लिए वंदे भारत एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है।
भारतीय रेलवे के अनुसार 16 कोच वाली एक वंदे भारत ट्रेन के निर्माण पर लगभग 130 से 150 करोड़ रुपये का खर्च आता है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह ट्रेन अपेक्षाकृत कम लागत में बेहतर गति और आराम उपलब्ध कराती है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे और उसकी इंजीनियरिंग परामर्श कंपनी राइट्स लिमिटेड (RITES) मिलकर वंदे भारत का नया स्टैंडर्ड गेज संस्करण विकसित कर रही है। वर्तमान में भारत में चल रही वंदे भारत ट्रेनें ब्रॉड गेज ट्रैक के लिए तैयार की गई हैं, जबकि दुनिया के अधिकांश देशों में स्टैंडर्ड गेज रेलवे नेटवर्क का उपयोग होता है। इसी वजह से विदेशी बाजार के लिए विशेष डिजाइन तैयार किया जा रहा है।
राइट्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राहुल मिथल के अनुसार इस परियोजना की डिजाइनिंग लगभग पूरी हो चुकी है। आवश्यक मंजूरी मिलने और विदेशी देशों से ऑर्डर प्राप्त होने के बाद उत्पादन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे भारत की रेल निर्माण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय आने वाले वर्षों में वंदे भारत नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने की योजना पर काम कर रहा है। रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देशभर में 800 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन करना है। वहीं वर्ष 2047 तक यह संख्या बढ़ाकर 4500 तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है। इसके साथ ही लंबी दूरी की यात्राओं के लिए स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें भी जल्द शुरू होने वाली हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आर्थिक पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राइट्स लिमिटेड के पास वर्तमान में लगभग 9,416 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है और वित्त वर्ष 2027 तक इसे बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत के निर्यात से भारतीय रेलवे को नई आय के स्रोत मिलेंगे और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
वंदे भारत का वैश्विक बाजार में प्रवेश केवल एक ट्रेन के निर्यात की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक क्षमता का प्रतीक भी है। इससे भारतीय रेलवे केवल रेल संचालन करने वाली संस्था नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के देशों को आधुनिक रेल समाधान उपलब्ध कराने वाला प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी बन सकेगा। मेक इन इंडिया की यह सफलता भारत को वैश्विक रेल उद्योग के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करने की क्षमता रखती है।

