पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई

पूर्वी चंपारण : विश्व धरोहर के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाला पूर्वी चंपारण का केसरिया स्तूप आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ईको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित हो सकता है। इसी उद्देश्य से बिहार सरकार ने इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और समग्र विकास की योजना को गति दे दी है। बुधवार को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकास कार्यों की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन कार्यों तथा प्रस्तावित विकास स्थलों का स्थलीय निरीक्षण भी किया।

बैठक में क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण के जिला पदाधिकारी, मोतिहारी के वन प्रमंडल पदाधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान जिला पदाधिकारी ने स्तूप के आसपास उपलब्ध भूमि पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए। साथ ही पूरे पर्यटन सर्किट को अधिक आकर्षक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से निकटवर्ती सरोत्तर झील के विकास का महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा।

समीक्षा के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों ने स्मारक संरक्षण से जुड़े नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि स्तूप की चाहरदीवारी से 100 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वहीं 100 से 200 मीटर की दूरी तक सात मीटर से अधिक ऊंचाई वाले किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं होगी। सभी विकास योजनाओं को इन्हीं मानकों के अनुरूप अंतिम रूप देने पर सहमति बनी।

अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना में ऊंची इमारतों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल ईको-फ्रेंडली हट्स, हरित क्षेत्र, प्राकृतिक सौंदर्य और आकर्षक लैंडस्केपिंग को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की मूल पहचान सुरक्षित रहे और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक ने जैन पार्क विकसित करने का सुझाव दिया, जबकि चकिया के अनुमंडल पदाधिकारी ने विपश्यना केंद्र की गतिविधियों को भी पर्यटन विकास योजना में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। वन प्रमंडल पदाधिकारी ने जानकारी दी कि सरोत्तर झील को आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। इसके साथ भविष्य में वहां पहुंच पथ विकसित कर ईको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को साकार करने की योजना है।

बैठक के अंत में अपर मुख्य सचिव ने विभागीय ईको-टूरिज्म निर्माण सलाहकार को निर्देश दिया कि बैठक के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और प्रस्तावों को समाहित करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन शीघ्र तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरती है तो केसरिया स्तूप न केवल अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पूर्वी चंपारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख ईको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में भी स्थापित होगा। इस अवसर पर मोतिहारी के जिला पदाधिकारी सौरव सुमन यादव सहित जिले के अन्य वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।