• सभी का डायलिसिस जारी, एक महिला वेंटिलेटर पर।राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। एक महीने पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में सी-सेक्शन के बाद किडनी फेल होने से पांच महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य महिलाओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था। अब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से भी इसी तरह का मामला सामने आया है, जहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई है और सभी का इलाज गहन चिकित्सा इकाई में चल रहा है।


जानकारी के अनुसार, प्रभावित सभी महिलाओं का डायलिसिस किया जा रहा है। मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर विशेष निगरानी में रखा गया है। इनमें फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की हालत सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। प्रभावित महिलाओं की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच है।

बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम करीब 10 से 15 दिन पहले शुरू हुआ था। पीबीएम अस्पताल के मैटरनिटी विंग में जिन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, उनमें ऑपरेशन के बाद अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगीं। महिलाओं को पेशाब रुकने, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने और प्लेटलेट काउंट तेजी से कम होने जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तुरंत आईसीयू में स्थानांतरित किया गया।


मामले ने तब गंभीर रूप ले लिया जब एक के बाद एक कई महिलाओं में लगभग समान लक्षण दिखाई देने लगे। आरोप है कि शुरुआती दौर में अस्पताल प्रशासन और कुछ चिकित्सकों ने मामले को सामान्य जटिलता बताकर ज्यादा महत्व नहीं दिया, लेकिन मरीजों की लगातार बिगड़ती हालत ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रमुख डॉ. संतोष खजोटिया ने कहा कि किडनी फेल होने के पीछे केवल संक्रमण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव भी इसकी एक संभावित वजह हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।


इस घटना ने कोटा मेडिकल कॉलेज में सामने आए मामले की याद ताजा कर दी है। वहां हुई जांच एम्स दिल्ली को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि गर्भवती महिलाओं को रक्तस्राव रोकने के लिए दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में आवश्यक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं थे। इसके बाद राजस्थान ड्रग विभाग की शिकायत पर अमृतसर स्थित संबंधित दवा निर्माता कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।


एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईसीयू में भर्ती सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में एक आधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर लगाने की तैयारी की जा रही है, जो करीब 90 सेकंड में संक्रमण की पहचान करने में सक्षम होगा।

नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र फालौदिया ने बताया कि मरीजों में HELLP सिंड्रोम जैसी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति भी पाई गई है। उन्होंने कहा कि पांच गंभीर मरीजों में से एक महिला वेंटिलेटर पर है।

अस्पताल में संक्रमण की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।