खरीद कीमत 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, सरकार का मानना, इस फैसले से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे

नई दिल्ली। प्याज की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मूल्य स्थिरीकरण बफर के तहत प्याज की सरकारी खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई खरीद दर लागू होने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार का लक्ष्य बाजार में कीमतों को संतुलित बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक को और मजबूत करना है।

केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए प्याज की खरीद कीमत 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। नई दर आज से प्रभावी हो गई है। इस फैसले के बाद राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) के माध्यम से संशोधित दर पर प्याज की खरीद की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा और बफर स्टॉक तैयार करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। सरकार का कहना है कि उपलब्ध उत्पादन को देखते हुए देश में प्याज की कुल उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई चिंता नहीं है। हालांकि, मौसम के सामान्य प्रभाव के कारण कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव संभव है।

सरकार के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में पर्याप्त मात्रा में प्याज का भंडारण उपलब्ध है और वर्तमान समय में भंडारित प्याज की कोई कमी नहीं है। देशभर की मंडियों में प्रतिदिन 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक बनी हुई है। अकेले महाराष्ट्र में यह आवक 30 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से अधिक है। बेहतर गुणवत्ता वाला प्याज अभी भी भंडार में मौजूद है, जिसके जरूरत के अनुसार बाजार में आने की संभावना है।

मौजूदा समय में अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य लगभग 31 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि कुछ प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में औसत खुदरा कीमत करीब 18 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है।

सरकार ने बताया कि मानसून के आगमन में देरी और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा के कारण व्यापारियों का एक वर्ग भविष्य में कीमतें बढ़ने की उम्मीद में सट्टेबाजी के आधार पर खरीदारी कर रहा है। हालांकि, प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में वर्तमान कीमतों पर मांग सामान्य बनी हुई है। नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ उत्पादक क्षेत्रों में सट्टेबाजी की गतिविधियां देखी जा रही हैं, लेकिन यह वास्तविक मांग की तुलना में भविष्य की संभावनाओं पर अधिक आधारित है।

निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति सामान्य बनी हुई है। जून 2026 के दौरान देश से लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया गया। हालांकि, व्यापारियों का मानना है कि आने वाले कुछ समय में निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की नई फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुवाई लगभग 15 दिन की देरी से हुई है। वहीं, कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे क्षेत्रों में बुवाई सामान्य स्तर के लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। सरकार का कहना है कि उत्पादन, भंडारण और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।