• गौरी बाजार के इंदूपुर में आज भी जिंदा है गांधी के भाषण की गूंज
 ये तस्वीर में दिख रहा छोटा सा चबूतरा कोई आम चबूतरा नहीं है। ये वही मंच है, जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1929 में खड़े होकर देवरिया-गोरखपुर के लोगों को स्वाधीनता का मंत्र दिया था

गणेश धर द्विवेदी

क्या है इतिहास?

इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि महात्मा गांधी का गोरखपुर में दूसरा दौरा 4 अक्टूबर 1929 को हुआ था। यह दौरा 1921 के दौरे से ज्यादा व्यापक था। इसी दौरे के क्रम में गांधी जी ने गोला, घुघली, महराजगंज, बरहज, चौरीचौरा और गौरी बाजार क्षेत्र में सभाएं की थीं।

उस समय गौरी बाजार गोरखपुर जिले का हिस्सा था और देवरिया 1947 में अलग जिला बना। इंदूपुर गांव में लगने वाले प्रसिद्ध मेले के मैदान में यह चबूतरा बनाया गया था। जैसे ही गांधी जी चबूतरे पर चढ़े, हजारों किसानों और मजदूरों ने जयकारे से उनका स्वागत किया।

क्यों अहम था यह दौरा?

1929 वह साल था जब देश में पूर्ण स्वराज की मांग तेज थी। इसी साल दिसंबर में लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया था। उससे ठीक दो महीने पहले गांधी जी ने पूर्वांचल की इस धरती पर आकर लोगों को सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए तैयार किया था।

इससे 7 साल पहले 1922 में गोरखपुर के चौरीचौरा में आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी थाने को फूंक दिया था, जिसके बाद यह पूरा इलाका अंग्रेजों की नजर में विद्रोही इलाका बन गया था। 1927 में रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी होने के बाद यह इलाका क्रांतिकारियों का गढ़ बन चुका था। ऐसे में गांधी जी का गौरी बाजार आना लोगों में नया जोश भरने जैसा था।

आज क्या है हाल?

97 साल बीत गए, इंदूपुर मेले का यह चबूतरा आज भी वहीं खड़ा है, लेकिन उपेक्षा का शिकार है। न कोई शिलापट है, न कोई स्मारक। ग्रामीण बताते हैं कि यहां हर साल मेला तो लगता है, लेकिन नई पीढ़ी को पता ही नहीं कि इस माटी पर महात्मा गांधी के कदम पड़े थे।

स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इसे 'गांधी विरासत स्थल' के रूप में विकसित करे, यहां गांधी जी की प्रतिमा और एक संग्रहालय बनाया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके।