राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, मोदी ने खादी खरीदने का किया आह्वान

नई दिल्ली : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर शुक्रवार को पूरा देश सत्य, अहिंसा और स्वदेशी के उनके संदेश से जुड़ा नजर आया। राजधानी दिल्ली से लेकर देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों तक श्रद्धांजलि सभाओं, स्वच्छता कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के माध्यम से बापू को याद किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर भी देश ने उनकी सादगी, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा को नमन किया।

राष्ट्रीय राजधानी में राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सिलसिला सुबह से चला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी राजघाट पर पुष्पांजलि अर्पित कर बापू को नमन किया। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में गांधीजी के सत्य, अहिंसा, शांति, सद्भाव, स्वदेशी और सेवा के आदर्शों को याद किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है और मानवता से जुड़े रहने तक उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने गांधीजी के स्वदेशी के आग्रह को याद करते हुए खादी को इसका प्रमुख प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने लोगों से दो अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने और उसे स्वदेशी कहने में गर्व महसूस करने का आह्वान किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बापू का शाश्वत संदेश बेहतर समाज और विकसित भारत की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि शास्त्री की सादगी और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी गहराई से प्रेरित करता है। उनका सौम्य व्यक्तित्व हर भारतीय को गर्व से भरता है, जबकि उनका संकल्प चट्टान की तरह दृढ़ था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि गांधीजी का जीवन और उनके आदर्श दुनियाभर में सम्मानित हैं। दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और संघर्ष के माहौल में उनका शांति और अहिंसा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। विकास के लाभ से कोई नागरिक वंचित न रहे, इसके लिए संवेदना और समावेशिता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह गांधीजी के ‘सर्वोदय’ यानी सभी के कल्याण और उत्थान के आदर्श को दर्शाता है। उन्होंने नागरिकों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प दोहराने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सत्य और अहिंसा में गांधीजी का अटूट विश्वास, न्याय के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा में गहरा विश्वास आज भी मानवता को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन और संदेश शांति, करुणा, निस्वार्थता और सेवा के स्थायी प्रकाशस्तंभ हैं।

उपराष्ट्रपति ने लोगों से गांधीजी के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने और न्यायपूर्ण, सद्भावपूर्ण तथा समावेशी समाज के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज को भी पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।