केंद्र में मौजूद अतिविशाल ब्लैक होल का प्रभाव बेहद दूर तक फैली गैस पर भी पड़ने के मिले संकेत। जेट के रास्ते में आने वाली गैस होती है ऊर्जावान, नए तारों के निर्माण की प्रक्रिया हो सकती है धीमी
नई दिल्ली : आकार सौर मंडल जितना और असर पूरी विशाल आकाशगंगा पर। अंतरिक्ष की दुनिया में यह हैरान करने वाला काम आकाशगंगा के केंद्र में बैठा अतिविशाल ब्लैक होल कर सकता है। वैज्ञानिकों ने अब उस संभावित प्रक्रिया का पता लगाया है, जिसके जरिए ब्लैक होल से निकलने वाले शक्तिशाली जेट आकाशगंगा के चारों ओर फैली गैस को प्रभावित करते हैं और नए तारों के जन्म पर भी अंकुश लगा सकते हैं। यानी आकाशगंगा का भविष्य काफी हद तक उसके केंद्र में मौजूद ब्लैक होल से जुड़ा हो सकता है।
आकाशगंगा केवल उतनी नहीं होती, जितनी चमकते तारों और धूल के साथ हमें दिखाई देती है। उसकी डिस्क के बाहर गैस का एक विशाल और बेहद विरल आवरण मौजूद रहता है। इसे सर्कमगैलेक्टिक मीडियम यानी सीजीएम कहा जाता है। यह आकाशगंगा के आकार से 10 से 20 गुना अधिक दूरी तक फैला हो सकता है और यही गैस भविष्य में नए तारों के निर्माण के लिए ईंधन उपलब्ध कराती है।
यहीं एक बड़ा सवाल वैज्ञानिकों को लंबे समय से परेशान करता रहा है। यदि इस विशाल भंडार की पूरी गैस ठंडी होकर तारों में बदल जाए तो ब्रह्मांड में बेहद चमकीली और तारों से भरी आकाशगंगाएं दिखाई देनी चाहिए, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। आखिर इस गैस को तारे बनने से कौन रोक रहा है?
रमन अनुसंधान संस्थान और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम को इसका संभावित जवाब ब्लैक होल के शक्तिशाली जेट में मिला है। ब्लैक होल केवल अपने आसपास की गैस और धूल को निगलते ही नहीं हैं, बल्कि उनसे अत्यधिक गर्म प्लाज्मा के शक्तिशाली जेट भी निकल सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ये जेट जब सीजीएम की गैस से टकराते हैं तो जोरदार झटका पैदा होता है। इससे गैस ऊर्जावान और आयनित हो जाती है। ऐसी गैस एक विशेष प्रकार की चमक पैदा करती है। शोधकर्ताओं ने इसी चमक को खोजने की कोशिश की।
दिलचस्प बात यह रही कि सभी दिशाओं के आंकड़ों को एक साथ देखने पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। लेकिन वैज्ञानिकों ने जब जेट की दिशा में जांच की तो मजबूत संकेत सामने आया। इससे पता चला कि जेट पूरी आकाशगंगा की गैस को समान रूप से प्रभावित नहीं करता, बल्कि अपने रास्ते में आने वाली गैस पर ज्यादा असर डालता है।
शोधपत्र की प्रमुख लेखिका और रमन अनुसंधान संस्थान की सहायक प्रोफेसर नम्रता रॉय के अनुसार यह प्रभाव तारकीय डिस्क के किनारे और सीजीएम की बाहरी सीमा के पास विशेष रूप से मजबूत मिला।
ठंडी गैस इकट्ठी होकर नए तारों को जन्म देती है, लेकिन ब्लैक होल का जेट उसे गर्म और विक्षुब्ध कर सकता है। इससे गैस एकत्र नहीं हो पाती और तारों के बनने की प्रक्रिया दब जाती है। इस तरह आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अपेक्षाकृत छोटा ब्लैक होल अपने से बेहद विशाल क्षेत्र को प्रभावित कर उस आकाशगंगा के भविष्य की दिशा बदल सकता है।
