पश्चिम एशिया में 40 दिन से जारी संघर्ष के बीच अचानक हालात बदले, होर्मुज स्ट्रेट खोलने की सहमति
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बीते 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच आखिरकार एक ऐसा मोड़ आया, जिसने दुनिया को बड़ी तबाही के मुहाने से वापस खींच लिया। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान हुआ है, जिससे फिलहाल जंग पर अस्थायी ब्रेक लग गया है। यह फैसला उस वक्त आया, जब हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि किसी बड़े और विनाशकारी हमले की आशंका जताई जा रही थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा वॉर काउंसिल की बैठक के बाद की। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ लंबी बातचीत हुई, जिसमें उनसे ईरान पर होने वाले संभावित विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया गया। इस बातचीत के बाद हालात तेजी से बदले और कूटनीतिक रास्ता खुलता नजर आया।
ट्रंप के मुताबिक ईरान ने अमेरिका की अहम शर्त मान ली है और होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमति दे दी है। इसके बाद अमेरिका ने भी दो हफ्तों तक ईरान पर बमबारी और सैन्य हमले रोकने का फैसला किया। इस फैसले के साथ इजरायल ने भी अपने हमलों पर विराम लगाने की सहमति जता दी, जिससे क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह रही कि यह युद्धविराम ट्रंप की तय डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले लागू हुआ। भारतीय समयानुसार सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक ईरान को अल्टीमेटम दिया गया था कि यदि होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो बड़े पैमाने पर कार्रवाई होगी। इस डेडलाइन के खत्म होने से पहले ही हालात बदल गए और टकराव टल गया।
बताया जा रहा है कि अगर यह समझौता नहीं होता तो अमेरिका की ओर से बड़े सैन्य हमले की तैयारी पूरी हो चुकी थी। ब्रिटेन समेत दुनिया के कई सैन्य ठिकानों से बी-52 बॉम्बर उड़ान भरने के लिए तैयार थे। इसी वजह से वैश्विक स्तर पर यह आशंका जताई जा रही थी कि मामला परमाणु हमले तक पहुंच सकता है।
ट्रंप के बयानों ने भी इस डर को और बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा था कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से चला आ रहा संघर्ष अब खत्म होने के करीब है और संभव है कि बड़ा बदलाव देखने को मिले।
अमेरिका का दावा है कि उसने अपने अधिकांश सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए हैं और अब वह स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। इसी क्रम में ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव भी सामने आया है, जिस पर दोनों पक्ष विचार कर रहे हैं।
ईरान में इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारी डर और बेचैनी का माहौल रहा। संभावित हमले की आशंका के बीच लोग रातभर जागते रहे और कई जगहों पर पुलों, पावर प्लांटों और नागरिक ठिकानों के बाहर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया गया।
फिलहाल यह दो हफ्तों का युद्धविराम सिर्फ एक विराम नहीं, बल्कि उस संभावित तबाही से बचने का मौका है, जिसकी आशंका पूरी दुनिया को डरा रही थी। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समझौते में बदल पाएगी या फिर यह संघर्ष दोबारा भड़क उठेगा।